भाजपा विधायक इंद्रकुमार साहू – “2007 से भंग ट्रस्ट की जमीनों की अवैध खरीदी-बिक्री और बैंक खातों में जमा करोड़ों का संचालन कौन कर रहा ?”
मंहत रामआशीष दास द्वारा “ठाकुर रामचंद्र स्वामी जैतुसाव मठ” के आठ अवैध खरीदी-बिक्री प्रकरणों की याचिका उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ एवं न्यायालय, पंजीयक सार्वजनिक न्यास मे की दाखिल.
पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़. राज्य में विधानसभा के बजट सत्र का आज अंतिम दिन था। अभनपुर विधायक इन्द्र कुमार साहू ने विधानसभा में एक तारांकित प्रश्न पूछा था कि राजधानी रायपुर स्थित “ठाकुर रामचंद्र स्वामी जैतुसाव मठ” की कितनी भूमि है, मठ की भूमि के शासकीय अधिग्रहण से प्राप्त मुआवजा राशि, प्राप्त राशि से मिला ब्याज और इन सभी राशियों का खर्च।
जिस पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में जवाब प्रस्तुत कर बताया कि विभिन्न दिनांकों को मठ को भूमि अधिग्रहण पर दी गई राशि 11.5 करोड़, 1.46 करोड़, 86.88 लाख और 30.75 लाख रुपए है। पंरतु प्राप्त मुआवजा राशि को ट्रस्ट द्वारा किन-किन प्रयोजनों के लिए किस व्यक्ति के माध्यम से तथा किसकी अनुमति से आहरित किया गया है एवं जमा राशि पर अर्जित व्यास के संबंध में जानकारी सार्वजनिक न्यास शाखा में उपलब्ध नहीं है। संचालन समिति, संचालक मंडल, ट्रस्टी मंडल को भंग करने के संबंध में पारित आदेश या निर्देश की जानकारी लोक न्यास शाखा में उपलब्ध नहीं है। अतः जानकारी दिया जाना संभव नहीं है।
विधानसभा के पटल में दिए गए इस जवाब पर अभनपुर विधायक इंद्रकुमार साहू ने बहुत ही कड़ा पत्र विभागीय मंत्री राजेश अग्रवाल को लिखा है। उन्होंने पत्र में तीखी भाषा का उपयोग करते हुए स्पष्ट रूप से एस.डी.एम, रायपुर और पंजीयक, सार्वजनिक न्यास पर गंभीर आरोप लगाये है।
भाजपा विधायक ने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि “मेरे द्वारा मांगी गई जानकारी पर संबंधित अधिकारी द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं बताया गया है। जबकि सार्वजनिक न्यास की ऑडिट की जिम्मेदारी उन्हीं की है। 2007 में संबंधित ट्रस्ट को भंग करने एवं रिसीवर नियुक्त करने की अनुशंसा की गई थी। यदि ट्रस्ट भंग हो चुका है तो वर्तमान में ट्रस्ट के बैंक खातों का संचालन कौन कर रहा है यह स्पष्ट करना उनका दायित्व है।


उन्होंने चार बिंदुओं पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई है कि संबंधित अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरत रहे हैं, समय पर ऑडिट नहीं कर रहे हैं, विधानसभा को गलत भ्रामक एवं अधूरी जानकारी दे रहे हैं, गंभीर अनियमिताओं में संलिप्तता प्रतीत होती है।
उन्होंने इस पूरे प्रकरण को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ACB/EOW से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाए और ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों एवं बैंक खातों की जांच कर अनियमिताओं को उजागर किया जाए और दोषियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
इस पूरे मामले में यह तो स्पष्ट हो गया है की राज्य के और खासकर राजधानी रायपुर के सार्वजनिक न्यास-पब्लिक ट्रस्ट के मठ-मंदिरों में करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा है और जिम्मेदार अधिकारी भी इस फर्जीवाड़ों में शामिल हैं।
यक्ष प्रश्न तो यह है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा जो लोकतंत्र का मंदिर और राज्य की सबसे बड़ी पंचायत है वहां भ्रामक, गलत और आधी-अधूरी जानकारी राज्य के अफसरों द्वारा भेजी जा रही है…………. 2 ?
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