RNN24 विशेष संवाददाता
रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ IPS अधिकारी रतन लाल डांगी एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। एक महिला जो कि कथित तौर पर एक सब-इंस्पेक्टर की पत्नी बताई जा रही हैं ने उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस मुख्यालय पहुंचकर आरोपों के संबंध में सबूत पेश किए हैं।
पीड़िता का आरोप है कि उन्होंने 15 अक्टूबर 2025 को पुलिस महानिदेशक, छत्तीसगढ़ (DGP) को लिखित रूप से शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण के संबंध में स्वयं उपस्थित होकर शिकायत प्रस्तुत की थी। प्रस्तुत शिकायत के बाद जांच के लिए एक विशेष समिति भी गठित की गई थी, जिसने 28 अक्टूबर और 3 नवंबर 2025 को पीडिता का बयान दर्ज किया था। पीड़िता के अनुसार इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
पीड़िता का कहना है कि अब तक क्यों आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। क्योंकि वो पुलिस विभाग के ही बड़े अफसर हैं। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि रतन लाल डांगी अपने पद और प्रभाव का उपयोग कर विभिन्न माध्यमों से उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।
पीड़ित महिला ने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी निम्न पद पर कार्यरत पुलिसकर्मी पर इस तरह के आरोप लगे होते, तो अब तक उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही हो चुकी होती। पीड़िता का एक और गंभीर आरोप है कि जांच प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है, ताकि वह दबाव में आकर शिकायत वापस ले लें और आरोपी अधिकारी को बचाया जा सके।
वैसे भी इस पूरे मामले की कार्यवाही में हो रही देरी, पुलिस विभाग में असमानता और भेदभाव को ही दर्शाती है। क्योंकि पुलिस कर्मचारी और परिवार कल्याण संघ ने इस पूरे मामले की शिक़ायत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से लिखित रूप से की थी। परंतु जांच में कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रहीं हैं।
इस पूरे मामले पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतन लाल डांगी से रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 न्यूज चैनल की टीम ने संपर्क किया था पर उन्होंने मोबाइल फोन नहीं उठाया ना ही खबर लिखे जाने के दौरान वापस काल बैक किया। साथ ही उनके आफिस के लैंडलाइन नंबर पर भी संपर्क करने पर फोन रिसीव नहीं किया गया। वर्तमान में आईपीएस रतन लाल डांगी, आई.जी., नार्कोटिक्स के पद पर पुलिस मुख्यालय में ही पदस्थ हैं जहां सबूतों के साथ पीड़ित महिला पहुंची थी।
फिलहाल इस मामले में पुलिस विभाग की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस अपने पर लगे इस सवालिया निशान को कैसे हटा सकेगी ये देखने वाली बात होगी ?




