रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान बालोद जिले में आयोजित स्काउट-गाइड के रोवर-रेंजर जंबूरी कार्यक्रम को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आयोजन में हुए खर्च, टेंडर प्रक्रिया और संभावित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरा और पूरे मामले की जांच सदन की समिति या विधायकों की कमेटी से कराने की मांग की। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल में उमेश पटेल ने पूछा कि पहले जारी टेंडर को रद्द कर नया टेंडर क्यों निकाला गया। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि पहले टेंडर की शर्तें काफी कठिन और जटिल थीं, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर भागीदारी नहीं हो पा रही थी। इसी वजह से शर्तों में संशोधन कर नया टेंडर जारी किया गया।
मंत्री ने बताया कि भारत स्काउट एंड गाइड की राष्ट्रीय संस्था से आयोजन की सहमति मिलने के बाद राज्य सरकार ने 5 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई थी। राष्ट्रीय संस्था ने जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया करने का सुझाव दिया था, लेकिन आयुक्त की ओर से पत्र लिखकर बताया गया कि इस कार्य के लिए जेम पोर्टल से खरीद संभव नहीं है।
इस पर उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि किसी खास व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों को डाउनग्रेड किया गया और पूरी प्रक्रिया में भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि 24 दिसंबर 2025 को नया टेंडर जारी किया गया और उसकी अंतिम तिथि 3 जनवरी तय की गई। ऐसे में क्या टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया था?
सदन में स्काउट-गाइड संगठन के अध्यक्ष पद को लेकर भी सवाल उठा। मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि स्कूल शिक्षा मंत्री ही पदेन अध्यक्ष होता है। इस पर उमेश पटेल ने परिषद को भंग करने के अधिकार को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि एक सांसद खुद को अध्यक्ष बता रहे हैं, जबकि मंत्री भी अध्यक्ष होने का दावा कर रहे हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि टेंडर किसी सांसद ने नहीं, बल्कि जिला प्रशासन ने रद्द किया था और बाद में नया टेंडर जारी किया गया।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि स्काउट-गाइड के अध्यक्ष पद को लेकर मामला अदालत में लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर को डाउनग्रेड किया गया और टेंडर जारी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया। उन्होंने इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने और उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने की मांग की।
जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि जेम पोर्टल से होने वाली प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की संभावना नहीं रहती, इसलिए जांच की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत स्काउट एंड गाइड के राष्ट्रीय मुख्यालय की टीम लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के बाद सीधे बालोद पहुंची थी और अपने हिस्से का काम पहले ही शुरू कर दिया था।
मंत्री ने सदन को बताया कि बालोद में आयोजित जंबूरी कार्यक्रम के लिए क्रॉसिंग एरिना, शौचालय, जल व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि व्यवस्था, आवास के लिए टेंट और डोम, बैरिकेडिंग, भोजनालय तथा प्रिंटिंग सहित अन्य व्यवस्थाओं पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि जंबूरी से जुड़े कार्यों के लिए मेसर्स अमर भारत किराया भंडार को 5 करोड़ 18 लाख 88 हजार 860 रुपये का टेंडर दिया गया था। टेंडर की शर्तें तय करने के लिए एक समिति गठित की गई थी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर बदलने संबंधी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
बालोद स्काउट-गाइड जंबूरी पर विधानसभा में हंगामा, भ्रष्टाचार के आरोपों पर विपक्ष का वॉकआउट
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