रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दुर्ग और बलरामपुर में सामने आए अफीम की खेती के मामलों का हवाला देते हुए गृह मंत्री विजय शर्मा से इस्तीफे की मांग कर दी। बघेल ने कहा, “अगर गृह मंत्री में थोड़ी भी नैतिकता है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।”
भूपेश बघेल ने सदन में कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान ही दो जिलों—दुर्ग और बलरामपुर—में अफीम की खेती का मामला सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि 5 मार्च को दुर्ग में इसकी सूचना पुलिस को फोन के जरिए दी गई थी और उस कॉल की रिकॉर्डिंग उनके पास है, जिसे जरूरत पड़ने पर सदन के पटल पर रखा जा सकता है। बघेल ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने सदन को गुमराह करते हुए इसे मुखबिर की सूचना बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि मामले के मुख्य आरोपी विनायक ताम्रकर को हथकड़ी क्यों नहीं लगाई गई और क्या पूरे मामले में लीपापोती की जा रही है।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष द्वारा पूरे प्रदेश में जांच की मांग की गई थी, लेकिन इसी बीच बलरामपुर जिले के कुसमी ब्लॉक में भी अफीम की खेती का मामला सामने आ गया। बघेल ने कहा कि यदि प्रदेश में नशे की खेती बढ़ रही है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी।
सदन में नक्सलवाद के मुद्दे पर भी तीखी बहस हुई। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल उठाया कि नक्सलवाद के पनपने की जिम्मेदारी कौन लेगा। इस पर वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जो लोग सबूत की बात करते हैं, वे तथ्य सामने क्यों नहीं रखते। इसके जवाब में भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य गठन के समय नक्सलवाद केवल तीन जिलों तक सीमित था, लेकिन बाद के वर्षों में इसका विस्तार हुआ।
भूपेश बघेल ने झीरम घाटी नक्सल हमले का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना में कांग्रेस ने अपने कई वरिष्ठ नेताओं को खोया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी बनाई थी और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सच सामने आना चाहिए। बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि झीरम हमले में शामिल नक्सलियों को केंद्र सरकार द्वारा नौकरी दी गई है।
इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि झीरम हमले में शामिल नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया है और इस तरह के आरोप लगाना गलत है। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने कहा कि नक्सलवाद खत्म करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का खजाना हमेशा खुला रहेगा।
भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने का दावा कर रही है, तो उस दिन इसका जश्न मनाने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के साथ बस्तर में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हत्या और चाकूबाजी की घटनाएं बढ़ रही हैं, पुलिस हिरासत में मौतें हो रही हैं और ताजा मामला गृह मंत्री के जिले कवर्धा से सामने आया है, जहां एक बैगा आदिवासी नाबालिग की पिटाई के बाद मौत हो गई।
इसके साथ ही उन्होंने सरकारी आवासों के मुद्दे को भी उठाया और आरोप लगाया कि कुछ मंत्री दो-दो सरकारी बंगलों का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री द्वारा “कवर्धा सदन” बनवाया गया है, जिसका बजट कहां से आया और किसकी अनुमति से यह निर्माण हुआ—इसकी भी जानकारी सरकार को देनी चाहिए।



