पंकज विश्वकर्मा(समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़. राजधानी रायपुर के तहसीलदार राममूर्ति दीवान का कार्यालय अब भूमाफियों का अड्डा बन गया है, शासन-प्रशासन के द्वारा तत्काल प्रभाव से तहसील कार्यालय के सभी कर्मचारियों का तबादला कर देने के बाद अब तहसीलदार राममूर्ति दीवान अपने कक्ष में भूमाफिया हरिवल्लभ अग्रवाल और उसके दलाल अकलेश खटोड़ उर्फ अखिलेश जैन को बैठाकर सार्वजनिक न्यास और सरकारी जमीनों को कब्जे में लेकर लाभ प्राप्त करने का खाका तैयार कर रहे हैं।
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3 माह पहले जिस सार्वजनिक न्यास की जमीन के सीमांकन के आवेदन पर पहले तहसीलदार राममूर्ति दीवान ने दल गठित कर सीमांकन का आदेश पारित किया और फिर तत्काल उस आवेदन को निरस्त कर सीमांकन को रोक दिया, अब उसी सार्वजनिक न्यास की भूमि के विनियमन के नामांतरण कर आपत्ति मांग कर पूरे सिस्टम का माखौल बना रहे हैं।
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या यूं कहें भूमाफियों के सरकारी दलाल बन कर उन्हें बुनकरों की जमीनों पर वैध कब्जा दे रहे हैं।
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इस सड चुकी व्यवस्था में क्या राममूर्ति दीवान अकेले हैं? या सभी की सहमति है? भूलें ना कार्यपालिका कि अभी भी विधायिकाओं और न्यायपालिका में दम है।




