रायपुर। छत्तीसगढ़ के कोल लेवी घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) रायपुर जोन ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। एजेंसी ने आरोपी सौम्या चौरसिया और निखिल चंद्राकर से जुड़ी करीब 2.66 करोड़ रुपये मूल्य की आठ अचल संपत्तियों को अटैच कर लिया है। इनमें जमीन के टुकड़े और रिहायशी फ्लैट शामिल हैं।
इस कार्रवाई के बाद घोटाले में अब तक अटैच की गई संपत्तियों की कुल राशि 273 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के माध्यम से ये संपत्तियां जब्त की हैं। जांच में पाया गया है कि ये संपत्तियां अपराध की कमाई से खरीदी गई थीं और आरोपियों ने इन्हें अपने रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज कराया था।
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ED ने मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 35 आरोपियों के खिलाफ 5 चालान विशेष अदालत में पेश किए जा चुके हैं। जांच में सामने आया है कि जुलाई 2020 से जून 2022 तक राज्य में कोयले के ट्रांसपोर्टरों से टन के 25 रुपये की दर से अवैध वसूली की गई। इस अवधि में सिंडिकेट ने करीब 540 करोड़ रुपये की जबरन वसूली की। वसूली गई राशि का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं को रिश्वत देने, चुनावी खर्चों और चल-अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।
ED ने पुष्टि की है कि अब तक 273 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है और उन्हें अटैच किया गया है। जांच एजेंसी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है और अपराध की कमाई से जुड़ी अन्य संपत्तियों की तलाश की जा रही है।
यह कार्रवाई कोल लेवी घोटाले में ED की अब तक की सबसे बड़ी संपत्ति जब्ती में से एक है और मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



