पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़- छत्तीसगढ़ में भाजपानीत साय सरकार द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत प्रदेश में 15 नवंबर से तय लक्ष्य 160 लाख मिट्रिक टन या 16 करोड़ क्विंटल का धान खरीदी महाअभियान शुरू किया गया था। साय सरकार द्वारा राज्य के 2,739 उपार्जन केन्द्रों में 2058 सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से खरीदी का कार्य शुरू किया गया था।
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 55 दिनों में 16.95 लाख पंजीकृत किसानों से 93.12 लाख मिट्रिक टन धान की खरीदीं की जा चुकी है। सरकार का दावा है कि इस खरीदी के माध्यम से 20 हजार 753 करोड़ रुपए का भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा चुका है।
पिछली बार साय सरकार ने 149.25 लाख मीट्रिक टन धान उपार्जित किया था। राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत खरीफ सीजन 2024-25 में रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। इसमें मोटा धान 81.98 लाख मीट्रिक टन, पतला धान 10.75 लाख मीट्रिक टन और सरना धान 56.52 लाख मीट्रिक टन शामिल था। धान की यह खरीदी राज्य बनने के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।



इस बीच कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा कि “लक्ष्य से कम धान खरीदी करने रकबा समर्पण का षड्यंत्र भाजपा का किसान विरोधी चरित्र है, जारी टोकन और वास्तविक खरीदी में अंतर बढ़ाने का नोडल अधिकारियों को दिया जा रहा है लक्ष्य”।

प्रदेश कांग्रेस का आरोप है कि इस खरीफ सीजन के धान खरीदी को पूरा होने में अब बस एक पखवाड़ा ही बचा है। यही वो समय है जब बड़े किसानों का धान मंडी में आता है, ऐसे समय में खरीदी को नियंत्रित करने के लिए बहुत अव्यावहारिक शर्त धान खरीदी के लिये नियुक्त नोडल अधिकारियों के सामने रखा गया है। खरीदी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जारी निर्देश में साफ तौर पर कहा गया है कि उपार्जन केंद्र में प्रतिदिन काटे गए टोकन और वास्तविक खरीदी में ज्यादा से ज्यादा अंतर लाना है, मतलब जितना टोकन काटा गया है, उतना धान मत खरीदो। धान खरीदी में किसानों को धान बेचने से रोकने की कई तरह से कोशिश की गई है जिसका नतीजा है कि इस बार धान हर सोसाइटियों में अब तक कम खरीदा गया है।

अभी भी करीब 5 लाख ऐसे किसान हैं, जिन्होंने एक बार भी धान नहीं बेचा है। अब अंतिम के 15 दिनों में धान की आवक तेज होगी, इसी को रोकने दुर्भावना पूर्वक किसान विरोधी षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। एक तरफ प्रतिदिन टोकन की मात्रा में यह सरकार कटौती कर रही है, दूसरी तरफ सत्यापन के लिए अलग फार्मूला अपनाया जा रहा है ताकि किसानों को अपना पूरा धान बेचने से रोका जा सके। भौतिक सत्यापन के लिए अलग से ऐप बनाया गया है जिसकी ट्रेनिंग पटवारियों को दी जा चुकी है। बिना सत्यापन के किसी भी किसान का धान नहीं खरीदना है। पिछले साल की खरीदी के हिसाब से भौतिक सत्यापन करने का आदेश देकर दबाव बनाया जा रहा है, जिसका विरोध पटवारियों ने किया है। रकबा समर्पण के नाम पर धान कम खरीदने का आरोप कांग्रेस लगा रही है। रायगढ़ जिला पटवारी संघ का ज्ञापन धान खरीदी को लेकर इस सरकार की मंशा को बेहद स्पष्ट करते हैं। पटवारियों ने बड़े ही स्पष्ट रूप से यह कहा है कि राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों द्वारा सभी किसानों पर रकबा समर्पण हेतु अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, ये आरोप बेहद ही संगीन हैं।



