जगदलपुर। बस्तर जिले का एकमात्र मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल स्व. बलिराम कश्यप स्मृति मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, डिमरापाल खुद गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार हो गया है। जीवनरक्षक मानी जाने वाली सीटी स्कैन, एक्स-रे सहित कई महत्वपूर्ण मशीनें महीनों से खराब पड़ी हैं, वार्डों में गंदगी और संक्रमण का माहौल है, वहीं शौचालयों की हालत इतनी बदतर है कि मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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कभी पूरे बस्तर संभाग के सात जिलों के लिए लाइफलाइन माने जाने वाला यह मेडिकल कॉलेज अब केवल एक शैक्षणिक केंद्र बनकर रह गया है। स्थापना के कुछ ही वर्षों में यह अस्पताल व्यवस्थाओं की बदहाली का प्रतीक बन गया है। शासन द्वारा सुशासन के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मरीजों के इलाज के दौरान उन्हें मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ रहा है।

अस्पताल में उपलब्ध लगभग सभी बड़ी जांच मशीनें खराब बताई जा रही हैं। सीटी स्कैन मशीन लंबे समय से बंद है, एक्स-रे और अन्य उपकरण भी कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं। महिला, पुरुष, शिशु और गायनिक वार्डों की स्थिति ऐसी है कि वहां प्रवेश करते ही स्वस्थ व्यक्ति भी खुद को बीमार महसूस करने लगता है। वार्डों में गंदगी और संक्रमण का डर साफ नजर आता है।

शौचालय और पेयजल की बदहाल स्थिति
अस्पताल के शौचालय या तो चोक हैं या फिर वहां पानी की व्यवस्था नहीं है। बदबू मारते टॉयलेट्स बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। हालत यह है कि भर्ती मरीजों के परिजनों को मरीजों को शौच के लिए अस्पताल परिसर से बाहर ले जाना पड़ रहा है। पीने के पानी की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे परिजन बाहर होटलों या दुकानों से पानी खरीदने को मजबूर हैं।
कामकाज में भी अव्यवस्था
शिशु रोग विभाग में निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ डॉक्टर मरीजों के इलाज को लेकर गंभीर दिखते हैं, लेकिन जूनियर स्टाफ का एक वर्ग उनके निर्देशों को लगातार नजरअंदाज करता है। इससे इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
मेडिकल माफिया के आरोप
स्थानीय जानकारों का आरोप है कि यह मेडिकल कॉलेज मेडिकल माफिया के शिकंजे में फंसा हुआ है। आरोप लगाया जा रहा है कि यदि किसी मरीज को बेहतर इलाज या वरिष्ठ डॉक्टर की सेवाएं चाहिए, तो उसे कथित तौर पर ‘सेटिंग’ करनी पड़ती है। कहा जा रहा है कि वरिष्ठ डॉक्टरों के गुट स्थानीय नेताओं के संरक्षण में मनमानी कर रहे हैं, जिससे आम मरीज सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहा है।
प्रबंधन का पक्ष
इस पूरे मामले पर मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू का कहना है कि मशीनें लगातार उपयोग के कारण खराब होती हैं, लेकिन उन्हें जल्द ही ठीक कराया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अन्य व्यवस्थाओं को भी दुरुस्त किया जाएगा।



