रायपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा है कि भारत के विकास का ग्रोथ इंजन अब छत्तीसगढ़ बनता जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी के संयुक्त प्रयासों से छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति करेगा और पर्यटन व संस्कृति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाएगा।
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शेखावत स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत 146 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भोरमदेव पर्यटन कॉरिडोर के विधिवत भूमिपूजन के अवसर पर सभा को संबोधित कर रहे थे। इस योजना के तहत भोरमदेव मंदिर परिसर से मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ और सरोदा जलाशय तक एक सुव्यवस्थित एवं समग्र पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर जिले के प्रमुख धार्मिक और पुरातात्विक स्थलों को एक सशक्त पर्यटन श्रृंखला से जोड़ेगा और भोरमदेव को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी विशिष्ट पहचान दिलाएगा। भोरमदेव कॉरिडोर का विकास उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कबीरधाम जिले सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह दिन ऐतिहासिक है। नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।
उन्होंने नक्सलवाद को प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से अब छत्तीसगढ़ नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा है। सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, पेयजल, बिजली, डीबीटी और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों तक पहुंच रही हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में सकारात्मक बदलाव करते हुए अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है, साथ ही रोजगार न मिलने की स्थिति में हर्जाने की गारंटी भी जोड़ी गई है। उन्होंने इसे “मोदी की गारंटी” बताते हुए प्रधानमंत्री का आभार जताया।
केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि लगभग एक हजार वर्ष पुराना भोरमदेव मंदिर देश की अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है। इस कॉरिडोर के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसके संरक्षण का मजबूत आधार तैयार किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों और अधिकारियों से अपील की कि 146 करोड़ रुपये की इस परियोजना में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए, क्योंकि यह कार्य धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा हुआ है।



