ब्यूरो रिपोर्ट
रायपुर/छत्तीसगढ़ : भारत माला परियोजना से जुड़े करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार तड़के बड़ी और जबरजस्त कार्रवाई की है। राजधानी रायपुर और महासमुंद में एक साथ छापेमारी करते हुए ईडी की 7 अलग-अलग टीमों ने करीब 9 ठिकानों को खंगाला। पूरी कार्यवाही मास्टरमाइंड हरमीत खनूजा और उसके सहयोगियों और घोटाले से जुड़े अधिकारियों के परिसरों पर की जा रही है।
सूत्रों ने यह भी बताया है कि मास्टर माइंड हरमीत खनूजा और उसके परिवार सहित सहयोगियों को मुआवजा घोटाले की करोड़ों रुपए की रकम मिली थी जिसको उसने जमीनों सहित आलीशान प्रापर्टी खरीदने में किया है। जिसमें व्ही.आई.पी रोड़ के पास एक आलीशान काम्प्लेक्स में करोड़ों रुपए के आफिस फ्लैट सहित बेशकीमती दर्जनों एकड़ जमीन शामिल हैं। मुआवजा घोटाले की रकम को अन्य व्यवसायिक संदिग्ध गतिविधियों में भी खपाया गया है।
सूत्रों के मुताबिक ईडी अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की गहन जांच कर रहे हैं। छापेमारी की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी की जा रही है।
महासमुंद में कारोबारी जशबीर सिंह बग्गा के बसंत कॉलोनी स्थित आवास पर भी ईडी ने दबिश दी है। बग्गा होंडा शोरूम के संचालक बताए जा रहे हैं। दो गाड़ियों में पहुंची ईडी की टीम ने उनके घर से संबंधित कागजात खंगाले हैं।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में भारत माला परियोजना के तहत रायपुर से विशाखापट्टनम तक करीब 950 किलोमीटर सड़क निर्माण किया जाना है। इसमें रायपुर–विशाखापट्टनम फोरलेन और दुर्ग–आरंग सिक्सलेन सड़क शामिल है। परियोजना के लिए बड़ी संख्या में किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन अब भी कई किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है।
इस घोटाले का मामला विधानसभा बजट सत्र 2025 के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत द्वारा उठाया गया था, जिसके बाद जांच का फैसला लिया गया। जांच में सामने आया कि विशाखापट्टनम–रायपुर कॉरिडोर में तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों ने भूमाफियाओं को नियमों के विपरीत कई गुना अधिक मुआवजा दिलाया, जिससे शासन को करीब 600 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति हुई।
मामला उजागर होने के बाद मार्च माह में तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू, दो तहसीलदार और तीन पटवारियों को निलंबित किया गया था। उस समय निर्भय साहू जगदलपुर नगर निगम आयुक्त के पद पर पदस्थ थे। राज्य सरकार ने इस पूरे घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी है, जबकि अब ईडी की एंट्री से जांच और भी गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है।



