हिंदू परिवारों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की स्थापना बेहद शुभ मानी जाती है। जैसा कि एक शिशु की देखभाल की जाती है, ठीक वैसे ही नंदलाल की दैनिक सेवा — उठाना, स्नान कराना, वस्त्र पहनाना, भोग लगाना व विश्राम देना — अत्यंत आवश्यक है।
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शास्त्रों में कहा गया है कि यदि स्नान सही समय पर किया जाए, तो घर में सुख-शांति, प्रेम और समृद्धि का वास बढ़ता है। वहीं गलत समय पर स्नान कराने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता
सुबह का मुहूर्त सर्वोत्तम — ब्रह्म मुहूर्त में कराएं स्नान
ज्योतिष के अनुसार —
- ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
- यह समय पूजा और स्नान के लिए सबसे श्रेष्ठ
- वातावरण सात्विक, ऊर्जा शुद्ध होती है
- इस समय सेवा करने से भक्त को शीघ्र फल मिलता है
यदि यह संभव न हो → स्व Sunrise के बाद 8:00 बजे तक भी स्नान करा सकते हैं।
- सुबह के स्नान से परिवार में सकारात्मकता और देवकृपा बढ़ती है।
- दोपहर का समय – वर्जित, मंदिरों के कपाट भी रहते हैं बंद
लोग सुविधा अनुसार दोपहर में स्नान करा देते हैं,
परंतु शास्त्र कहते हैं—
12:00 PM से 4:00 PM → भगवान का विश्राम/भोजन समय
इस दौरान अभिषेक या पूजा स्वीकार्य नहीं
लेकिन यदि सुबह नहीं कर पाए तो शाम 4:00 – 5:00 बजे का समय विकल्प रूप में ठीक माना गया है।
रात्रि में स्नान पूर्णतः निषिद्ध
रात तमोगुण का समय
- यह अवस्था विश्राम और शयन के लिए निर्धारित
- देवता रात्रि में सेवा स्वीकार नहीं करते
- इसलिए सूर्यास्त के बाद स्नान/अभिषेक न करें।



