जगदलपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन के दावों की जमीनी हकीकत बस्तर संभाग के जगदलपुर विकासखंड बकावंड में सवालों के घेरे में है। यहां अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि न केवल शासन की योजनाओं को पलीता लगा रहे हैं, बल्कि गरीबों के पसीने की कमाई हजम करने में भी कोई संकोच नहीं कर रहे।

प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना भी भ्रष्टाचार और मनमानी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। बकावंड ब्लॉक की ग्राम पंचायत टलनार से सामने आया मामला प्रशासनिक लापरवाही और पंचायत स्तर के भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करता है।
यहां पीएम आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास की पूरी राशि हितग्राही को नहीं दी गई, वहीं आवास निर्माण से जुड़ी मनरेगा मजदूरी भी हड़प ली गई। आरोप है कि मजदूरी की राशि ऐसे व्यक्ति के नाम मस्टर रोल में दर्ज कर दी गई, जिसने एक दिन भी काम नहीं किया, जबकि कई दिनों तक मेहनत करने वाली महिला हितग्राही को एक रुपया तक नहीं मिला।
सरपंच और सचिव की मनमानी का नतीजा यह हुआ कि हितग्राही फूलमती को न तो उसकी मजदूरी मिली और न ही आवास की शेष किश्त। आज हालात यह हैं कि फूलमती का पक्का घर अधूरा पड़ा है, और वह दर-दर भटकने को मजबूर है।
हितग्राही फूलमती ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसे अब तक केवल 95 हजार रुपये ही मिले हैं, जबकि पूरी राशि अब तक मिल जानी चाहिए थी। मजदूरी की रकम भी उसे नहीं दी गई। कई बार शिकायत करने के बावजूद सरपंच और सचिव चुप्पी साधे बैठे हैं।
गांव में चर्चा है कि आवास की बची हुई राशि सरपंच, सचिव और जनपद पंचायत बकावंड के कुछ कर्मचारियों ने आपस में बांट ली। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल योजनाओं की लूट है, बल्कि गरीबों के सपनों पर सीधा हमला है।
अब सवाल यह उठता है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों को पक्का मकान देने का सपना दिखा रहे हैं, और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सुशासन की बात कर रहे हैं, तो ऐसे भ्रष्ट अधिकारी और जनप्रतिनिधि उस मंशा को कैसे पलीतागा कर रहे हैं?
— क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या एक और गरीब महिला की आवाज फाइलों में दबकर रह जाएगी?



