रायपुर। नए साल और 26 जनवरी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करते हुए छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस ने बड़ी और एकसाथ कार्रवाई की है। राजधानी के लगभग सभी थाना क्षेत्रों में देर रात ताबड़तोड़ छापेमारी से पूरे शहर में हड़कंप मच गया। इस संयुक्त कार्रवाई में बैजनाथपारा और टिकरापारा इलाके से 61 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी संदिग्धों से पूछताछ का सिलसिला जारी है।
पुलिस को इनपुट मिला था कि रायपुर में कुछ लोगों के विदेशी संपर्क हैं और बांग्लादेशी व रोहिंग्या घुसपैठियों की मौजूदगी की आशंका है। इसी आधार पर बैजनाथपारा, संजय नगर, शंकर नगर, मोवा, सिविल लाइन, सड्डू, बैरन बाजार, कचना, पंडरी, मोदहापारा, तेलीबांधा और अवंतीबाई चौक समेत कई इलाकों में एक साथ दबिश दी गई। शुरुआती कार्रवाई में 40 से 50 से अधिक संदिग्धों को थानों में लाया गया।
सूत्रों के मुताबिक विदेशी ऐप्स पर चैटिंग और संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस और साइबर क्राइम विभाग ने यह अभियान शुरू किया। आधी रात को नूरजहां होटल और भारत सिल्क हाउस के मालिकों सहित कई लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से देर रात तक राजधानी में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
बताया जा रहा है कि दिल्ली से मिले इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। सुरक्षा कारणों से दिन के बजाय रात में अभियान चलाया गया, ताकि किसी तरह की भगदड़ या कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने। हालांकि कुछ संदिग्धों के फरार होने की भी सूचना है, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
इसी कड़ी में राजधानी पुलिस ने मंगलवार को ‘ऑपरेशन समाधान’ के तहत दूसरे राज्यों से आए एक हजार से अधिक लोगों का सत्यापन किया। इस दौरान करीब 100 से ज्यादा ऐसे लोग सामने आए, जिनके दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। इनमें से कई लोग पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश सीमा क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं।
पुलिस के अनुसार ये संदिग्ध मोवा, खमतराई, टिकरापारा और उरला थाना क्षेत्रों में रहकर ऑटो चलाने और मजदूरी जैसे काम कर रहे थे। पूछताछ के दौरान अधिकांश लोग सिर्फ एक-दो साल पहले रायपुर आने की जानकारी ही दे सके, जिससे उनकी गतिविधियों को लेकर संदेह और गहरा गया है।



