बस्तर। बकावंड ब्लॉक अंतर्गत आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित बकावंड के धान खरीदी केंद्र में किसानों के शोषण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। किसानों का कहना है कि नमी का हवाला देकर उनसे निर्धारित मात्रा से अधिक धान लिया जा रहा है, जिससे उनकी मेहनत की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
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किसानों के अनुसार शासन के प्रावधान के तहत प्रति कट्टा 40 किलो 700 ग्राम धान लेने का नियम है, लेकिन खरीदी केंद्र में उनसे करीब 42 किलो 620 ग्राम धान लिया जा रहा है। किसानों ने बताया कि वे खेतों में कड़ी मेहनत से धान की कटाई, मिंजाई और सुखाने की प्रक्रिया पूरी कर धान केंद्र तक लाते हैं, जहां शासन द्वारा तय 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की जाती है। इसके बावजूद अतिरिक्त धान लिया जाना उनके साथ खुला अन्याय है।

इस मामले में खरीदी केंद्र प्रभारी लक्ष्मी नारायण का कहना है कि धान में नमी की मात्रा अधिक रहती है, इसलिए अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। वहीं लेंपस प्रबंधक टिकेश्वर सेठिया ने फोन पर बातचीत में स्पष्ट किया कि शासन का आदेश केवल 40 किलो 700 ग्राम धान लेने का ही है। यदि इससे अधिक धान लिया जा रहा है तो वे स्वयं मौके पर जाकर जांच करेंगे।

समिति के मैनेजर अनंत प्रसाद पांडे ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान समय में किसान अतिरिक्त धान नहीं देते हैं और इस तरह की शिकायतों पर उन्हें विश्वास नहीं है। मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर उन्होंने असहमति जताते हुए बयान देने से भी परहेज किया।
इधर किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी और न्यायसंगत धान खरीदी सुनिश्चित हो सके।
होगी जांच और कार्रवाई
इस पूरे मामले पर बकावंड एसडीएम मनीष वर्मा ने कहा कि यदि निर्धारित मात्रा से अधिक धान लिया जा रहा है तो इसकी जांच कर संबंधित कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



