पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
विजन 2047 : भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में 2047 तक आत्मनिर्भर, समृद्ध और विश्व की प्रमुख शक्तियों में से एक बनाने की एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति है। इसमें छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्य भी एक दूरदर्शी लक्ष्य को लेकर विकसित राष्ट्र बनाने के लिए चिंतनशील, प्रयासरत और दृढ़संकल्पित है, जिसमें आर्थिक समृद्धि, तकनीकी प्रगति, बेहतर बुनियादी ढांचा और सामाजिक सशक्तिकरण शामिल है। जो युवाओं, गरीबों, महिलाओं और किसानों पर केंद्रित होगा।

भारत सरकार और कई राज्य सरकारों जिसमें छत्तीसगढ़ शामिल हैं एक दूरदर्शी लक्ष्य जिसका उद्देश्य भारत को 2047 में आजादी के 100 साल पूरे होने तक एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का है, क्या छत्तीसगढ़ में विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस जो दो साल पहले तक सत्ता में थी वो विमुख क्यों है। ये एक यक्ष प्रश्न है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2021 को आह्वान किया था कि वर्ष 2047 में भारत की आजादी के 100 वर्ष जिसे उन्होंने अमृतकाल कहा था पूर्ण होने तक देश को विकसित राष्ट्र बनाना है। साथ ही इस दिशा में केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को ’टीम इंडिया’ के रूप में एकजुट होकर काम करना होगा की एक विस्तृत रूपरेखा और विजन था। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य नीति आयोग को ’’अमृत कालः छत्तीसगढ़ विजन /2047’’ विजन डॉक्यूमेंट बनाने का उत्तरदायित्व दिया गया है।

प्रदेश के सभी विधानसभा सदस्यों सहित राज्य के आम नागरिकों से भी तीन समयावधियों लघु काल 5 वर्ष, मध्य काल 10 वर्ष और दीर्घकाल 15 वर्ष के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। सुझाव उद्योग और सेवाओं में सुधार, कृषि एवं वानिकी में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य व पोषण, बुनियादी ढांचे का विस्तार, समाज कल्याण, सुशासन, स्थिरता और पुनर्याेजी विकास आदि क्षेत्रों में मांगे गए हैं।

राज्य में अपशिष्ट से धन बनाने, राज्य को हरित राज्य बनाने, नवीकरण ऊर्जा पर निर्भरता, स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी, अनुसंधान और विकास, समुदाय भागीदारी, स्थिरता और पुनर्याेजी विकास के लिए छत्तीसगढ़ को एक मॉडल के रूप में स्थापित करना है। हरा-भरा छत्तीसगढ़-समृद्धि छत्तीसगढ़ बनाने, हरित ऊर्जा राज्य बनाने, अवशिष्ट चक्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था, उन्नत प्रौद्योगिकी को लागू करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने, वाटरशेड प्रबंधन क्षेत्र में सुधार सहित अन्य विषयों पर कार्य करने पर बल दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से नवनिर्मित विधानसभा भवन में शुरू हो रहा है। यह चार दिवसीय सत्र 14 से 17 दिसंबर तक चलेगा। विधानसभा के सत्र के आज पहले दिन 14 दिसंबर को सदन में ‘विजन 2047’ विषय पर चर्चा प्रस्तावित है, लेकिन कांग्रेस ने इस चर्चा में भाग नहीं लेने और पहले दिन की कार्यवाही का बहिष्कार करने का ऐलान किया है।

नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सत्र के लिए रणनीति तय की गई। बैठक के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह ‘विजन 2047’ पर चर्चा में भाग नहीं लेगी और पहले दिन की कार्यवाही का बहिष्कार करेगी। क्या उचित है ? इस अतिमहत्वपूर्ण चर्चा को छोड़ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत दिल्ली में पार्टी हाईकमान के एक धरनें और प्रदर्शन में शामिल होने रवाना हो गए क्यों ? क्या यह एक सियासी टकराव मात्र है या कांग्रेस की अपनी भूमिका से भागना है ? प्रदेश की आम जनता की जवाबदेही भी आप पर है क्योंकि राज्य में विधानसभा की 90 सीटों में से 35 विधायक आप के भी है। मतदान प्रतिशत के आधार पर राज्य की 42.23 प्रतिशत जनता ने आप पर भी विश्वास किया था।
यक्ष प्रश्न आज नहीं तो कल “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” आप से प्रश्न पूछेगा की हमारे भविष्य पर छत्तीसगढ़ की विधानसभा के सदन में जब इतनी बड़ी चर्चा चल रही थी तो आप भाग क्यों गये ? आपने चुनौती को स्वीकार कर हमारे हक में बात क्यों नहीं रखी ? आपने हमारे विश्वास को तोड़ क्यों दिया ? इस लोकतंत्र में सत्ता हो या विपक्ष को भूलना नहीं चाहिए की आम जनता सिर्फ पांच सालों में एक बार ही अपना फैसला सुनाती है जनादेश के रूप में।



