रायपुर। मंत्रिमंडल के द्वारा समर्पित नक्सलियों के आपराधिक प्रकरण वापस फैसले लेने की और उसकी समीक्षा की फैसला का निर्णय बेहद ही दुर्भाग्यजनक है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार बताये जो झीरम कांड में शामिल थे, जो ताड़मेटला, रानीबोदली, एडसमेटा जैसे नरसंहार में शामिल थे, जो सैकड़ों हजारों नरसंहार में शामिल थे, क्या उनका भी अपराधिक प्रकरण सरकार वापस लेगी?
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प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार की अपनी नक्सल नीति है, मुख्यधारा में लाने के लिए, सरकार उनके पुनर्वास के बारे में फैसला करे लेकिन गंभीर आपराधिक घटना में शामिल नक्सली और सामान्य घटना में बंद जिसके खिलाफ चार्जशीट तक नहीं दाखिल कर पाये उनके बारे में सरकार अपना मत स्पष्ट करे।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि नक्सली के नाम पर जिन आदिवासियों को सरकार ने नक्सली बताकर जबरिया बंद कर रखा है, जिनके बारे में अदालत में चालान तक नहीं पेश किया गया है। सरकार बताये उनको छोड़ने के लिये क्या किया जा रहा है? जो निर्दाेष है किसी घटना और हत्या में शामिल नहीं थे, उनके बारे में पहले फैसला लिया जाना चाहिये। पुलिस के द्वारा सिर्फ टारगेट पूरा करने के लिये सैकड़ों आदिवासियों को जेल में बंद किया था। जो निर्दाेष है उनके बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है, पहले तो उनके लिये फैसला होना चाहिये।



