कांकेर। छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष और कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की जेल में हुई संदिग्ध मौत का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक भूचाल बनता जा रहा है। मामले की जांच के लिए गठित कांग्रेस की 7 सदस्यीय जांच समिति बुधवार को कांकेर जिला जेल पहुंची और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की।
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टीम की संयोजक और पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने सीधे तौर पर जेल प्रशासन और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जेल में पदस्थ जेलर ने अनभिज्ञता जताई, जबकि डॉक्टरों ने मुलाकात से इनकार कर दिया। भेड़िया का आरोप है कि यह पूरा मामला ऊपर से दबाव का है। जेल हो या अस्पताल – हर कोई चुप रहने को मजबूर दिखता है।
जांच दल जब जिला अस्पताल पहुंचा तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने कथित तौर पर जानकारी देने से इनकार कर दिया। टीम का दावा है कि 15 दिनों में दो बार अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद जीवन ठाकुर की बीमारी को लेकर कोई स्पष्ट मेडिकल रिपोर्ट साझा नहीं की गई।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि निर्धारित समय के बावजूद जीवन ठाकुर के बेटे को उनसे मिलने नहीं दिया गया। जांच समिति ने इसे अमानवीय व्यवहार बताया और कहा कि शासन ने उन्हें किसी “खतरनाक अपराधी” की तरह ट्रीट किया।
समय पर न खाना, न दवा – प्रशासन पर हत्या तुल्य लापरवाही का आरोप
पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया ने कहा कि जीवन ठाकुर को समय पर खाना तक नहीं दिया गया, दवाइयां नहीं मिलीं और गंभीर बीपी व शुगर की समस्या के बावजूद कोई नियमित इलाज नहीं हुआ। उन्होंने इसे सीधी प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टमेटिक क्रूरता करार दिया।
अचानक शिफ्टिंग और फिर मौत
जानकारी के अनुसार, जमीन विवाद के एक मामले में 12 अक्टूबर 2025 को चारामा के पूर्व जनपद अध्यक्ष जीवन ठाकुर को गिरफ्तार कर कांकेर जेल में रखा गया था। इसके बाद 2 दिसंबर को उन्हें बिना परिजनों को सूचना दिए रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया।
जेल प्रशासन का दावा है कि इसी अवधि में उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 4 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। हालांकि परिजन इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। अगर समय पर इलाज मिलता तो आज वे जिंदा होते।
वन अधिकार पट्टा घोटाला और अब न्यायिक जांच
जीवन ठाकुर वन अधिकार पट्टा घोटाले के मामले में जेल में थे। अब इस पूरे मामले में न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने आधिकारिक तौर पर जांच का आदेश जारी किया है।



