रायपुर/महासमुंद/छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। महासमुंद जिले के बागबाहरा में किसान मनबोध गाड़ा द्वारा गला काटकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
इस दर्दनाक घटनाक्रम के बाद हम सभी साथियों ने और रायपुर न्यूज नेटवर्क ने फैसला लिया है कि अब “पेन डाउन” — यानी सरकारी औपचारिकताओं और आधे-अधूरे दावों वाली खबरें नहीं छापी जाएंगी, जब तक आम किसानों की ज़मीनी हकीकत को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा।
टोकन सिस्टम बना किसानों की सबसे बड़ी पीड़ा
मनबोध गाड़ा, जो करीब 1 एकड़ 40 डिसमिल भूमि का छोटा किसान है, पिछले कई दिनों से धान बिक्री का टोकन कटवाने के लिए चॉइस सेंटर, सहकारी समिति और संबंधित कार्यालयों के लगातार चक्कर काट रहा था।
कभी ऑनलाइन सिस्टम फेल, तो कभी ऑफलाइन टोकन काटने से इनकार।
किसानों का कहना है कि पूरे प्रदेश में हालात एक जैसे हैं:
- बारदाने की भारी कमी
- तौल में गड़बड़ी
- वजन कम दिखाने की शिकायतें
- 7.5 तोला के नाम पर अवैध वसूली के आरोप
- टोकन लिमिट अचानक कम कर दी गई
इन्हीं हालातों से टूटकर मनबोध गाड़ा ने खुद को खत्म करने की कोशिश की — एक ऐसा कदम, जो पूरे सिस्टम की असफलता का जिंदा सबूत बन गया।
सरकारी पारदर्शिता पर सीधा सवाल
हमारे संस्थान ने पहले भी धान खरीदी की बदहाल स्थिति पर दो अहम खबरें प्रकाशित की थीं। इसके बाद अचानक सरकार ने राज्य स्तर पर दैनिक धान खरीदी के आंकड़े जारी करना बंद कर दिया।
अब सवाल सरल हैं:
- राज्यभर की धान खरीदी का अंतिम आधिकारिक आंकड़ा कब जारी किया गया था?
- सरकार ने यह जानकारी सार्वजनिक करना क्यों बंद किया?
- क्या आंकड़े छिपाए जा रहे हैं?



