रिपोर्ट – नसीम खान
रायपुर : छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट प्लांट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारी विरोध के बीच शुक्रवार को प्रशासन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया पूर्ण कर ली। अधिकांश ग्रामीणों ने प्लांट शुरू करने का विरोध किया। वहीं जनसुनवाई स्थल पर पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत की मौजूदगी भी रही।
उधर जिला पंचायत सदस्य ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
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भारी विरोध और सुरक्षा व्यवस्था के बीच जनसुनवाई आयोजित
बतौली क्षेत्र में पहले से संचालित एल्यूमिना प्लांट के बाद मैनपाट में नया बॉक्साइट प्लांट खोलने की तैयारी की जा रही है।
लेकिन प्लांट शुरू होने से पहले ही ग्रामीणों ने विरोध तेज कर दिया। जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों ने पंडाल उखाड़कर विरोध जताया, जिसके बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
अपर कलेक्टर के अनुसार, जनसुनवाई में लगभग 102 ग्रामीण पहुंचे, जिनमें अधिकांश ने प्लांट का विरोध किया। उन्होंने बताया कि 2 दिसंबर को पुनः जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें अंतिम निर्णय की दिशा स्पष्ट होगी। जनसुनवाई की वीडियोग्राफी व रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।
पर्यावरण और पर्यटन को नुकसान की आशंका
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्लांट खुलने से
मैनपाट का पर्यटन प्रभावित होगा
भू-जल स्तर गिर सकता है
हजारों पेड़ कटने से पर्यावरण को बड़ा नुकसान होगा
ग्रामीणों का कहना है कि वन अधिकार पट्टा प्राप्त कई किसानों के पट्टे निरस्त कर दिए गए हैं, जिसके बाद वे आजीविका से वंचित होने की स्थिति में हैं।
जनसुनवाई में सूचना छिपाने का आरोप
जनसुनवाई में पहुंचीं जिला पंचायत सदस्य रतनी नाग ने कहा कि
- जनसुनवाई की सही जानकारी ग्रामीणों को नहीं दी गई
- गाँव के संबंधित लोगों को बोलने का मौका नहीं दिया गया
- विरोध करने वालों पर दबाव बनाया गया
- समर्थन करने वाले अधिकतर लोग दूसरे क्षेत्रों के बताए जा रहे हैं
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समर्थन और विरोध की संख्या की रिसीविंग प्रशासन ने उपलब्ध नहीं कराई।
पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने जताया विरोध
पूर्व खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि
“एक ओर सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने की बात करती है, दूसरी ओर प्लांट खोलकर पर्यटन नष्ट करने का काम किया जा रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में पर्यटन विकास रुक गया है और खदानों को प्राथमिकता दी जा रही है।
अब फैसले पर टिकी सबकी नजर
भारी विरोध और आरोपों से घिरी यह जनसुनवाई कई सवाल खड़े कर गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि प्लांट के समर्थन के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि जनता इसका विरोध कर रही है।
अब देखना यह होगा कि—
जनता की बात सुनी जाएगी या पैसे और प्रभाव के दबाव में निर्णय लिया जाएगा?
प्रदेश सरकार जनभावना के आधार पर क्या फैसला लेती है?
यह फैसला आने वाला समय बताएगा।



