रायपुर : छत्तीसगढ़ में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोंटा से CPI के पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया के चलते बस्तर के हजारों आदिवासी वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। इसी चिंता को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी स्क्रूटनी चल रही है। मामला जल्द ही चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्या बागची की बेंच में लिस्ट हो सकता है।
यह भी पढ़े :- विकसित भारत@2047 की मजबूत नींव: PM मोदी ने रायपुर में DGP कॉन्फ्रेंस में पुलिस को दिया ‘मिशन 2047’ का मंत्र
कुंजाम, जो बस्तरिया राज मोर्चा के संयोजक भी हैं, का कहना है कि मौजूदा फॉर्मेट में लागू SIR, बस्तर की खास जनजातियों के लिए सीधा खतरा बन चुका है। उन्होंने कहा यह सिर्फ एक एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों से जुड़ा मुद्दा है। अगर समय रहते नियम नहीं बदले गए, तो लाखों आदिवासी वोटर लिस्ट से बाहर हो जाएंगे।
सलवा जुडूम के जख्म अब भी ताज़ा, दस्तावेज़ नहीं—तो वोट का अधिकार किस तरह बचेगा?
कुंजाम ने याद दिलाया कि सलवा जुडूम के दौरान 644 गांव वीरान हो गए थे, हजारों घर जला दिए गए थे। बड़ी संख्या में लोग अपने दस्तावेज़ खो चुके थे। अब जब ENROLLMENT नए सिरे से किया जा रहा है, तो यह समुदाय सबसे अधिक संकट में है। उनके शब्दों में कई गांव जंगल के भीतर हैं। वहां BLO तक नहीं पहुंच सकते। ऐसे में दस्तावेज़ आधारित वेरिफिकेशन आदिवासियों के साथ नाइंसाफी है।
बस्तर में चुनावी प्रतिनिधित्व पर बड़ा असर संभव
कुंजाम ने चेतावनी दी कि अगर SIR को लचीला और व्यावहारिक नहीं बनाया गया, तो बस्तर का लोकतांत्रिक संतुलन प्रभावित होगा।
उनका आरोप है कि शहरी स्टैंडर्ड की डॉक्यूमेंटेशन व्यवस्था को जंगलों में रहने वाली जनजातियों पर लागू करना अव्यावहारिक है। इससे हजारों नहीं, लाखों नाम लिस्ट से कट सकते हैं।”
रायपुर में SIR के दौरान दो विवाद: राजनीतिक टकराव तेज
इधर रायपुर में SIR प्रक्रिया खुद विवादों में फंस चुकी है। पहला विवाद 15 नवंबर को भाजपा विधायक और एक BLO के बीच हुआ, जिसमें बाद में कांग्रेस और BJP नेता आमने-सामने आ गए।
दूसरा विवाद 29 नवंबर को कालीमाता वार्ड में हुआ, जहां एक महिला और BLO के बीच झगड़े का वीडियो वायरल हो गया। शिकायत अभी तक नहीं हुई है, लेकिन वीडियो सोशल मीडिया में बहस का विषय बना हुआ है।
अब नज़र सुप्रीम कोर्ट पर
सुप्रीम कोर्ट से मिलने वाले शुरुआती निर्देश यह तय करेंगे कि बस्तर जैसे संवेदनशील और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण इलाके में SIR प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। कुंजाम ने दोहराया आज बात सिर्फ लिस्ट से नाम हटने की नहीं है, बल्कि बस्तर के आदिवासियों की राजनीतिक आवाज़ बचाने की है।



