बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। जिले के सरकंडा स्थित शासकीय हाई स्कूल (वर्तमान में आत्मानंद स्कूल) में कक्षा 8वीं में फेल छात्र की मार्कशीट में व्हाइटनर लगाकर अंक बदलने और उसे पास दिखाने का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। फर्जी मार्कशीट के आधार पर छात्र ने 9वीं और 10वीं की पढ़ाई भी पूरी कर ली, लेकिन सरकारी नौकरी के वेरिफिकेशन के दौरान यह धोखाधड़ी पकड़ी गई। फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
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कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
जानकारी के अनुसार, साल 2006 में छात्र रवि कुमार यादव 8वीं कक्षा में दो विषयों में सप्लीमेंट्री आया था। सप्लीमेंट्री परीक्षा में अनुपस्थित रहने के कारण उसे नियम अनुसार अनुत्तीर्ण घोषित किया गया। लेकिन स्कूल स्टाफ की मिलीभगत से उसकी मार्कशीट में व्हाइटनर लगाकर अंक बदल दिए गए और उसे उत्तीर्ण दिखा दिया गया। इसके बाद छात्र को 9वीं और 10वीं में एडमिशन भी दे दिया गया।

नौकरी वेरिफिकेशन में खुला घोटाला
कई वर्षों बाद जब छात्र ने सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया, तब दस्तावेज़ों के वेरिफिकेशन में मार्कशीट में व्हाइटनर से की गई छेड़छाड़ का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि स्कूल रिकॉर्ड में भी छात्र को पास दिखाया गया, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के आधिकारिक रिकॉर्ड में वह स्पष्ट रूप से फेल दर्ज है। इससे सीधे तौर पर स्कूल स्टाफ और तत्कालीन प्राचार्य की भूमिका पर शक गहरा गया है।

कार्रवाई शुरू – नोटिस जारी
मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्कालीन प्राचार्य और संबंधित शिक्षकों को नोटिस जारी कर दिया है। DEO ने कहा:- “यह अत्यंत गंभीर मामला है। जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”विभाग ने सभी रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं और विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

बड़े सवाल खड़े हुए
- फेल छात्र को अगली कक्षा में प्रवेश किसकी अनुमति से दिया गया?
- इतनी बड़ी हेराफेरी किसके संरक्षण में की गई?
- क्या यह सिर्फ एक मामला है या सिस्टम में और भी ऐसे उदाहरण छिपे हैं?
- मेहनत से पढ़ने वाले छात्रों के साथ यह अन्याय कैसे होने दिया गया?
शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर संकट
इस घटना ने सरकारी स्कूलों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
व्हाइटनर लगाकर अंक बदलने और मार्कशीट में हेराफेरी करना न केवल अपराध है बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा धब्बा भी है।
अब देखना होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और दोषियों पर कार्रवाई कितनी जल्दी होती है।



