नई दिल्ली। रविवार को इंडिया गेट पर आयोजित एक प्रदर्शन में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कुख्यात माओवादी कमांडर हिडमा के समर्थन में नारे लगाए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर हमला किया, सड़कों को अवरुद्ध किया और पेपर स्प्रे का भी इस्तेमाल किया।
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हालांकि, इस घटना के बाद मंगलवार को उसी इंडिया गेट पर कई नागरिक पुलिस के समर्थन में एकत्र हुए। उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर और नारे लगाते हुए सुरक्षा बलों के साथ एकजुटता दिखाई। इंडिया गेट पर आए तो उनके हाथों में तख्तियां नहीं, बल्कि आक्रोश और प्रतिरोध का संकल्प था— “हम दिल्ली पुलिस के साथ हैं।” ”जिस घर से हिडमा निकलेगा उस घर में घुसकर मारेंगे।” यह नारे सरकार के समर्थन के लिए नहीं, राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए थे।
घटना की जानकारी
सूत्रों के अनुसार, रविवार को आयोजित प्रदर्शन वायु प्रदूषण के मुद्दे पर था, लेकिन कुछ समूहों ने अचानक हिडमा का समर्थन शुरू कर दिया। दिल्ली पुलिस ने बताया कि हिंसा और अराजकता फैलाने वाले 22 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कहा कि यह घटना योजनाबद्ध थी और इसमें शामिल तत्व कानून और सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ थे।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
मंगलवार को इंडिया गेट पर जुटे नागरिकों ने कहा कि उनका उद्देश्य कानून का सम्मान करना और सुरक्षा बलों के साथ खड़ा होना था। नागरिकों ने नारे लगाकर प्रदर्शनकारियों के पूर्व में लगाए गए नारों का विरोध किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की घटनाएं दर्शाती हैं कि कुछ समूह सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों का लाभ उठाकर राजनीतिक या अपराधी एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं, और इसलिए नागरिकों और सुरक्षा बलों की सतर्कता आवश्यक है।



