रायपुर। छत्तीसगढ़ के 3200 करोड़ रुपये से ज्यादा के महाशराब घोटाले में ईडी और EOW की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। बुधवार को EOW/ACB ने विशेष अदालत में 7000 पन्नों का छठा पूरक चालान दाखिल कर पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास, अतुल सिंह ठाकुर, मुकेश मनचंदा, नितेश पुरोहित, यश पुरोहित और दीपेंद्र चावड़ा को आरोपी बनाया।
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यह चालान पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में चले कथित शराब माफिया सिंडिकेट के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा दस्तावेजी सबूत माना जा रहा है। ED की FIR के मुताबिक, IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के नेतृत्व में बने इस सिंडिकेट ने 2019-2023 तक शराब नीति में मनमाने बदलाव कर चहेती कंपनियों को फायदा पहुँचाया।
घोटाले का तरीका था हैरान करने वाला:
नोएडा की कंपनी से नकली होलोग्राम और सील बनवाए गए
महंगी शराब की बोतलों पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बेची गई
बिक्री की कोई जानकारी सरकार को नहीं मिली, एक्साइज ड्यूटी नहीं जमा हुई
सिर्फ टैक्स चोरी से ही सरकार को 2165 करोड़ का चूना लगा
काली कमाई कांग्रेस भवन निर्माण से लेकर नेताओं-मंत्रियों तक बँटी
अब तक गिरफ्तार बड़े नाम:
पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा
पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल
पूर्व IAS अनिल टुटेजा
कारोबारी अनवर ढेबर (एजाज ढेबर का भाई)
आबकारी विभाग के 28 अधिकारी (सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर)
नए चालान के बाद जांच एजेंसियाँ अब और ऊँचाई तक पहुँचने की तैयारी में हैं। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े राजनीतिक नामों पर गाज गिर सकती है।



