अयोध्या में आज मंगलवार को ऐतिहासिक क्षण साकार हुआ। (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने राम जन्मभूमि मंदिर के 191 फुट ऊँचे शिखर पर औपचारिक रूप से भगवा धर्मध्वज फहराया। यह ध्वजारोहण मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रतीक माना जा रहा है।

समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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“आज अयोध्या भारत की सांस्कृतिक चेतना के उत्कर्ष का साक्षी” — प्रधानमंत्री मोदी
ध्वजारोहण के बाद संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि यह अवसर समूचे देश और दुनिया के हर रामभक्त के लिए दिव्य आनंद का क्षण है।
उन्होंने कहा –
“आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। आज संपूर्ण भारत, संपूर्ण विश्व राममय है। हर रामभक्त के हृदय में अद्वितीय संतोष, कृतज्ञता और अलौकिक आनंद है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि राम मंदिर निर्माण का यह पड़ाव सदियों के दर्द और संघर्ष के अंत का प्रतीक है।
“सदियों के घाव आज भर रहे हैं। सदियों की वेदना आज विराम पा रही है। सदियों का संकल्प आज सिद्धि को प्राप्त हो रहा है। यह उस यज्ञ की पूर्णाहुति है जिसकी अग्नि 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही—जो कभी आस्था से डिगा नहीं, न विश्वास से टूटा।”
“धर्मध्वज भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है”
प्रधानमंत्री ने कहा कि मंदिर के शिखर पर स्थापित यह ध्वज केवल प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के नव-उद्भव का सूचक है।
उन्होंने कहा-
“यह धर्मध्वज संकल्प का प्रतीक है… संघर्ष से उत्पन्न विजय की गाथा है… सदियों से संजोए स्वप्न का साकार रूप है… और संतों की साधना व समाज की सहभागिता का पावन परिणाम है। यह आने वाली सदियों तक भगवान राम के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करता रहेगा।”

प्रधानमंत्री ने भगवा ध्वज के स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा-
“इसका भगवा रंग त्याग और मर्यादा का प्रतीक है। इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, अंकित ओम शब्द और कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करते हैं।”

—संकल्प, सफलता और प्रेरणा का प्रतीक
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा-
“यह ध्वज संकल्प है, सफलता है। यह ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है। यह संतों की साधना और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणीति है। यह प्रेरणा देता है कि ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’। यह संदेश देता है कि विश्व में कर्तव्य और कर्म की प्रधानता हो।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ध्वज समाज के लिए शांति, समानता और करुणा का संदेश लेकर आया है—
“यह कामना करता है कि समाज में न बैर हो, न भय हो; सबके जीवन में सुख और शांति हो।”



