अंबिकापुर। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस का भव्य समापन अंबिकापुर में हुआ, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। समारोह में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थिति दर्ज कराई और राष्ट्रपति के आगमन को राज्य के लिए “अत्यंत सौभाग्य का क्षण” बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का इस आयोजन में शामिल होना न केवल जनजातीय समाज के सम्मान का प्रतीक है, बल्कि उनकी उपस्थिति ने पूरे प्रदेश का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि हाल ही में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों के प्रतिनिधि राष्ट्रपति भवन जाकर उनसे मिले थे, और वापस लौटते समय उनके चेहरे पर खुशी और संतोष साफ झलक रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा-“उन्होंने मुझसे कहा कि राष्ट्रपति बिल्कुल ममतामयी हैं, और उनसे मिलकर ऐसा लगा जैसे किसी अपने से मुलाकात हुई हो।”
सीएम विष्णुदेव साय ने अपने भाषण में जनजातीय समाज के संघर्ष, बलिदान और गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समुदायों की साहसगाथाएँ हमेशा प्रेरणा देती रही हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपने स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर चुका है, और इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा, जिन्होंने अलग छत्तीसगढ़ राज्य का सपना साकार किया।
उन्होंने बताया कि रायपुर में नारायण सिंह ट्राइबल म्यूजियम का निर्माण जनजातीय क्रांतिकारियों की वीरगाथाओं को संरक्षित करने के लिए किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ उनके संघर्षों से प्रेरणा ले सकें। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनजातीय समाज का छत्तीसगढ़ के इतिहास, संस्कृति और अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मुख्यमंत्री ने तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े 12–13 लाख परिवारों के मुद्दे पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनकी आजीविका को मजबूत करने के लिए तेंदूपत्ता का समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है और संग्रहणकर्ताओं को सरकार की ओर से चरण पादुका वितरित की जा रही है, ताकि उन्हें सुरक्षा और सम्मान का एहसास हो।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति और मुख्यमंत्री के सम्बोधन ने इस समारोह को जनजातीय समाज के लिए गर्व और सम्मान का प्रतीक बना दिया। कार्यक्रम में आदिवासी जीवन, संस्कृति और परंपरा की विविध झलकें देखने को मिलीं।



