पंकज विश्वकर्मा (समाचार संपादक)
रायपुर/छत्तीसगढ़। लगातार विवादों में घिरे छत्तीसगढ़ शासन के बैंक अपेक्स के बड़े अधिकारियों पर फिर एक बार अत्यंत ही गंभीर आरोप लगें हैं। जिसकी शिकायत राजधानी के पुरानी बस्ती थाने में की गई है। इस पूरे मामले की जांच सी.एस.पी पुरानी बस्ती द्वारा जारी है। इस मामले में पुलिस अधिकारी के पुत्र से बैंक में नौकरी लगाने के नाम पर 5 लाख रुपए से ज्यादा रकम ऐंठ ली गई थी। पीड़ित पक्ष ने बताया है कि बैंक में नियमित भर्ती के नाम पर बैंक कर्मचारी के ही माध्यम से पैसा डी.जी.एम भूपेश चंद्रवंशी को दिया गया था। जबकि भर्ती अपेक्स की आउटसोर्सिंग एजेंसी ए.बी.आर के लिए की जा रही थी। इस आऊटसोर्सिंग एजेंसी के लिए 100 से ज्यादा भर्तियां की गई थी। और प्रत्येक भर्ती में 5-10 लाख रुपए की वसूली की गई थी। अपेक्स के अंदर ही यह चर्चा है कि इस मामले में वसूली का पैसा बैंक के एम.डी और केबिनेट मंत्री केदार कश्यप के ओ.एस.डी. कांडे तक को पहुंचाया गया है।
विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ए.बी.आर. आउटसोर्सिंग एजेंसी बैंक के ही बड़े अधिकारियों के पुत्रों को स्थापित करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। बाद में विवाद की स्थिति और उठ रहे प्रश्नों को विराम देने के लिए पूरा कंट्रोल अपने पास रख कर उसे नया नाम सी.डी.ओ कर कारनामे जारी रखें गये। साथ ही ए.बी.आर में सभी भर्ती किए गए अभ्यर्थीयों को सी.डी.ओ. में भी मर्ज कर उनकी सेवा जारी रखी गई। जबकि यदि दो अलग-अलग एजेंसी थी तो कम से कम कुछ नई भर्तियां तो अवश्य की जाती।
इसी आउटसोर्सिंग एजेंसी के द्वारा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और बैंक के पूर्व अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर के रिश्तेदार अरूण चंद्राकर की भी भर्ती की गई थी जो बरमकेला कांड का एक मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपियों में से एक है और अभी तक फरार है। बरमकेला कांड में 50 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला और आर्थिक अनियमितता हुई जिसमें हाल ही में तात्कालिक शाखा प्रबंधक डी.आर बाघमारे और कैशियर आशीष पटेल सहित कुछ आरोपियों को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है। इसी समय भर्ती की गई निशा तिवारी एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी हैं जिसकी भर्ती सुपरवाइजर के पद पर की गई थी वर्तमान में शारदा चौक ब्रांच में कैशियर के रूप में कार्यरत हैं। निशा तिवारी बिलासपुर के कांग्रेस नेता अरुण तिवारी की बहू है। साथ ही अरुण तिवारी पूर्व अध्यक्ष बैजनाथ चंद्राकर के करीबियों में शुमार किये जाते रहे हैं।
उस दौरान आउटसोर्सिंग एजेंसी के लिए 100 से ज्यादा भर्तियां आर्म्स गार्ड, डंडा गार्ड और सुपरवाइजर के पदों पर अस्थाई रूप से की गई थी पंरतु इसे ऐसा दिखाया गया कि ये अपेक्स बैंक की नियमित नियुक्ति है। और इसे ही आधार बना कर अभ्यर्थियों से 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक वसूल गये थे। इसी मामले में पुलिस अधिकारी के पुत्र ने पुरानी बस्ती थाने में डी.जी.एम. भूपेश चंद्रवंशी के नाम पर लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
इस मामले में अपेक्स के एक बड़े अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर रायपुर न्यूज नेटवर्क और RNN24 Digital News Chanel को बताया कि जिस लेखाधिकारी के माध्यम से ये पूरी वसूली की गई थी अब मामला खुलने पर उसे अब बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा है। पिछले एक से डेढ़ साल में तीन से ज्यादा ट्रांसफर कर चार पांच महीने की सैलरी भी रोक दी गई है। लेखाधिकारी का पहले लैलूंगा फिर बगीचा और बाद में जशपुर ट्रांसफर कर दिया गया। उसे हर हालत में राजधानी रायपुर से दूर रखा जा रहा है ताकि करोड़ों रुपए की यह वसूली का पर्दाफाश ना हो सके।
इस पूरे मामले में एम.डी कांडे और आऊटसोर्सिंग एजेंसी सी.डी.ओ. के प्रबंधक द्विवेदी से फोन पर संपर्क किया गया किसी ने भी फोन नहीं उठाया। जबकि डी.जी.एम भूपेश चंद्रवंशी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पर समाचार नहीं बनाने की हिदायत दे दी। पिछले दिनों राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने मिडिया से चर्चा में कहा था कि कानून अपना काम करेगा, अपराधी कोई भी हो नहीं छोड़ा जायेगा। अब देखने वाली बात यह है कि अपेक्स के इस मामले की जांच किस स्तर पर की जायेगी और क्या वास्तविक अपराधियों को कानूनी कार्यवाही की जद में लाया जायेगा या फिर रसूखदारों को बचा लिया जायेगा ?



