न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने सोमवार को गाज़ा के लिए अमेरिकी गाज़ा पीस प्लान को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव के तहत तबाह हो चुके क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती को अधिकृत किया गया है। साथ ही प्रस्ताव फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
रूस ने इस प्रस्ताव के विरोध में एक वैकल्पिक मसौदा पेश किया था, लेकिन अंतिम मतदान में रूस और चीन ने भाग नहीं लिया। 13-0 से प्रस्ताव पारित होने के बाद अमेरिका और अन्य देशों की यह आशंका भी खत्म हो गई कि रूस वीटो का इस्तेमाल कर प्रस्ताव रोक सकता है।
युद्धविराम और गाज़ा के भविष्य के लिए अहम कदम
इज़राइल और हमास के बीच दो साल से चल रहे युद्ध और हालिया युद्धविराम के बीच यह मतदान गाज़ा के भविष्य की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अरब और मुस्लिम देशों ने अंतरराष्ट्रीय बल के लिए सैनिक उपलब्ध कराने की इच्छा जताई थी, जिसके लिए सुरक्षा परिषद की अनुमति आवश्यक थी।
20-सूत्रीय योजना को समर्थन
अमेरिकी प्रस्ताव पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय युद्धविराम योजना का समर्थन करता है। इसमें—
‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक एक प्राधिकरण की स्थापना, जिसका नेतृत्व ट्रंप करेंगे
एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती
गाज़ा में सुरक्षा, सीमाओं की निगरानी और क्षेत्र के विसैन्यीकरण की जिम्मेदारी
जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। बोर्ड और बल का अधिकार वर्ष 2027 के अंत तक लागू रहेगा।
इज़राइल और हमास इस योजना के शुरुआती चरणों पर पहले ही सहमत हो चुके हैं, जिसके चलते युद्धविराम और बंधकों की रिहाई शुरू हुई थी। UNSC की मंजूरी के बाद अब यह योजना एक औपचारिक अंतरराष्ट्रीय आदेश बन गई है।
प्रस्ताव में क्या शामिल है?
प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण देता है।
गाज़ा के पुनर्निर्माण और आर्थिक स्थिरता के लिए रोडमैप प्रदान करता है।
तैनात स्थिरीकरण बल को गैर-सैन्यीकरण, हथियारों को निष्क्रिय करने और सैन्य ढांचे के खात्मे का अधिकार देता है।
फिलिस्तीनी राज्य पर इज़राइल का विरोध बरकरार
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को स्पष्ट कहा कि वह किसी भी प्रयास से फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का विरोध करेंगे। उनका कहना है कि ऐसा कदम हमास को फायदा पहुंचा सकता है और इज़राइल की सीमाओं पर सुरक्षा खतरा बढ़ा सकता है।
इसके बावजूद अरब और मुस्लिम देशों का समर्थन प्रस्ताव के पारित होने में निर्णायक रहा है, जो लंबे समय से युद्धविराम और स्थायी समाधान की मांग करते रहे हैं।
अमेरिका और अरब देशों का संयुक्त आह्वान
अमेरिकी मिशन ने कतर, मिस्र, यूएई, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, जॉर्डन और तुर्की के साथ एक संयुक्त बयान जारी कर इस प्रस्ताव को तत्काल अपनाने की अपील की थी। रूस ने अपनी अलग योजना पेश की थी, लेकिन वह पारित नहीं हो सकी।
दो साल में 69,000 से अधिक की मौत — गाज़ा मंत्रालय
गाज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इज़राइल के दो साल से अधिक समय तक चले सैन्य अभियान में 69,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं। मंत्रालय नागरिक और लड़ाकू का अलग आंकड़ा नहीं देता।



