रायपुर/कोरबा : छत्तीसगढ़ शासन के जल संसाधन विभाग द्वारा कोरबा जिले के विकासखण्ड- पोंडी-उपरोड़ा के अंतर्गत लेपरा से पोंडी उपरोड़ा तक तान नदी के दायीं तट का कटाव रोकने के लिए बैंक प्रोटेक्शन कार्य हेतु 4 करोड़ 23 लाख 35 हजार रूपए स्वीकृत किए है। योजना का कार्य पूर्ण कराने के लिए जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से मुख्य अभियंता, मिनिमाता (हसदेव) बांगो परियोजना, जल संसाधन विभाग बिलासपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी है। तान नदी कोरबा के आसपास बहने वाली हसदेव नदी की ही सहायक नदी है, जिसका नाम स्थानीय स्तर पर “तान” है।
पिछले दिनों छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के ताजा आदेश के मुताबिक हसदेव की प्रमुख सहायक नदी कोरबा की तान अब प्रदूषण से सुरक्षित रहेगी। राज्य शासन की ओर से पिछले दिनों हाईकोर्ट को यह शपथपत्र दिया गया था। इसमें कहा गया था कि नदी के स्वच्छ जल क्षेत्र में अब फ्लाई ऐश (राख) डंप नहीं की जाएगी। इस आश्वासन के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को निराकृत कर दिया। यह याचिका गोविंद शर्मा ने सीनियर एडवोकेट किशोर भादुड़ी के माध्यम से दाखिल की थी।
याचिकाकर्ता ने बताया था कि रीजनल ऑफिस कोरबा, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कोनकोना गांव के बंद स्टोन माइन के अंदर फ्लाई ऐश डंप करने की अनुमति दी गई थी। इसी अनुमति का फायदा उठाकर थर्मल पावर प्लांट संचालक तान नदी के आसपास राख डाल रहे थे, जो पर्यावरणीय मानकों का सीधा उल्लंघन था।
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि राख का इंपिंग क्षेत्र तान नदी से मात्र 150 मीटर दूरी पर है, जो भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 28 अगस्त 2019 के निर्देशों के खिलाफ है। मंत्रालय के इम्पैक्ट असेसमेंट डिवीजन ने स्पष्ट किया था कि ओपन माइनिंग क्षेत्र में राख इंपिंग जल स्रोतों से निर्धारित दूरी बनाए बिना नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान शासन से जवाब मांगा था। शासन की ओर से प्रस्तुत शपथपत्र में यह कहा गया कि अब तान नदी के स्वच्छ जल क्षेत्र में किसी भी प्रकार की फ्लाई ऐश इंपिंग नहीं की जाएगी और पर्यावरण सुरक्षा के सभी प्रावधानों का पालन किया जाएगा। इस पर कोर्ट ने याचिका को निराकूल करते हुए मामले को समाप्त कर दिया था।



