बस्तर। जिले के सबसे शिक्षित विकासखंड बकावंड से बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां गर्ल्स हायर सेकंडरी स्कूल में नाबालिग छात्राओं से बाल श्रम कराया जा रहा था। सामाजिक बुराइयों—बाल श्रम, बाल विवाह और शिक्षा—के खिलाफ बच्चों को जागरूक करने वाले शिक्षक खुद ही कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आए।
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शनिवार सुबह लगभग 9 बजे जब हमारे संवाददाता अचानक स्कूल पहुंचे, तो खेल अवधि के बाद छात्राओं को कक्षा में लौटने की जगह फावड़ा पकड़ाकर स्कूल परिसर में घास की छिलाई और सफाई कराई जा रही थी। छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म में ही मैदान में झुककर काम करती दिखीं। कुछ धूप में खड़ी थीं, जबकि कुछ स्टाफ की निगरानी में सफाई कर रही थीं। दृश्य देखकर ऐसा प्रतीत होता था मानो स्कूल परिसर किसी मजदूरी स्थल में बदल गया हो।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि शिक्षक पढ़ाई के बजाय छात्राओं को नियमित रूप से काम करने के निर्देश देते हैं। कई छात्राएं असहज होने के बावजूद डर के कारण मना नहीं कर पातीं। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी स्कूल में बच्चों से श्रम कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है और यह उनके शिक्षा अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए कठिन मेहनत करते हैं, न कि मजदूरी करवाने के लिए। उन्होंने दोषी शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
घटना सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने भी चिंता जताई है और प्रशासन से सख्त कदम उठाने की अपेक्षा की है।
बीईओ बोले — होगी सख्त कार्रवाई
“घटना की जानकारी मिली है। मैं स्वयं सोमवार को स्कूल जाकर प्राचार्य, शिक्षकों और छात्राओं से पूछताछ करूंगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करूंगा।”
— चंद्रशेखर यादव, बीईओ, बकावंड



