रायपुर। प्रदेश में सड़कों पर घूमते मवेशियों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए राज्य शासन गंभीर है, लेकिन नगर निकायों की नाकाफी कार्रवाई ने इस योजना की सफलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य शासन ने प्रदेश के सभी नगर निगम, पालिका और नगर पंचायतों को एक महीने तक सड़कों से मवेशियों को हटाने और हर हफ्ते रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही, शहर से 15 किलोमीटर के दायरे में भी निगरानी रखने, आवारा और घुमंतू पशुओं को हटाने और पशु मालिकों को जागरूक करने पर जोर दिया गया।
सड़कों पर सुरक्षा उपायों की अनदेखी
नगरीय प्रशासन विभाग की चिट्ठी में यह भी कहा गया कि रात में होने वाले हादसों को रोकने के लिए आवारा पशुओं पर रेडियम स्ट्रिप लगाने, प्रमुख मार्गों पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने और सड़क संकेतक बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद अधिकांश निकायों ने इस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाए।
निकायों की रिपोर्ट में दिखी गंभीरता की कमी
राज्य के 192 नगर निगम, पालिका और नगर पंचायतों में से 140 निकायों ने इस मामले में रिपोर्ट नहीं भेजी। जिन निकायों ने कार्रवाई की, उनके अनुसार 917 सड़कों पर 2,323 मवेशी पकड़े गए और लगभग 3,600 पशु मालिकों को समझाइश दी गई। इसी दौरान 904 पशु मालिकों से 20,000 रुपये का जुर्माना वसूला गया।
राजधानी रायपुर, बिरगांव नगर निगम और आसपास के इलाकों में सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े के बावजूद एक भी पशु मालिक पर कार्रवाई नहीं हुई। कुरुद में एक पशु मालिक पर मात्र 100 रुपए का जुर्माना लगाया गया।
आगे की कार्रवाई
अब सड़कों पर मवेशी न बैठने के लिए पशु मालिकों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिनके पशु नियमों का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ नोटिस और जुर्माना के साथ-साथ मुकदमा भी चलाया जा सकता है।



