नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी हत्याकांड में अहम फैसला सुनाते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की अपील स्वीकार कर मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया है। शीर्ष अदालत की तीन जजों की पीठ—न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता—ने राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष (सतीश जग्गी) की याचिकाएं खारिज कर दीं और कहा कि मामले की मेरिट पर विस्तृत सुनवाई की जाए।
अदालत ने क्या कहा
CBI द्वारा की गई जांच वाले आपराधिक मामलों में अपील का अधिकार राज्य सरकार के बजाय केंद्र सरकार के पास होता है। इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार की अपील विचारयोग्य नहीं है।
पीड़ित सतीश जग्गी की अपील भी खारिज हुई, क्योंकि बरी करने का आदेश 31 मई 2007 का है, जबकि CrPC की धारा 372—जो पीड़ित को अपील का अधिकार देती है—2009 से लागू हुई।
CBI की अपील में हुई देरी सुप्रीम कोर्ट ने माफ कर दी। अदालत ने कहा कि इतने गंभीर मामले को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट में पुन: सुनवाई के दौरान अमित जोगी, राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष—सभी को पूरा अवसर दिया जाए।
मामला क्या है
4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या हुई थी। शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की, बाद में मामला CBI को सौंपा गया। CBI ने अपनी जांच में अमित ऐश्वर्य जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट CBI की अपील पर मूल तथ्यों और सबूतों की पूरी समीक्षा करेगा और अंतिम निर्णय देगा।



