सुकमा। जिले के गोलापल्ली क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो पुलिस-ठेकेदार की मिलीभगत और वन विभाग के कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार को उजागर करता है। आरोप है कि अवैध मुरूम उत्खनन की वीडियोग्राफी कर रहे एक वनकर्मी को गोलापल्ली थाने के प्रभारी ने न केवल पीट दिया, बल्कि उसे झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी। इतना ही नहीं, थानेदार ने वनकर्मी के कैमरे से वीडियो और तस्वीरें भी डिलीट कर दीं।
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जानकारी के मुताबिक, सुकमा वनमंडल के गोलापल्ली परिक्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य के दौरान वनभूमि से अवैध रूप से मुरूम की खुदाई और पेड़ों की कटाई की जा रही थी। रेंजर को जब इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने अपने वाहन चालक को मौके की फोटोग्राफी करने भेजा। इसी दौरान गोलापल्ली के थानेदार मौके पर पहुंचे और फोटोग्राफी कर रहे वनकर्मी पर भड़क गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, थानेदार ने गाली-गलौज करते हुए उसकी पिटाई कर दी और गिरफ्तारी की धमकी दी।
मौके पर रेंजर के पहुंचने के बाद मामला किसी तरह शांत हुआ, लेकिन वन विभाग के कर्मचारी इस घटना से नाराज हैं और उन्होंने इसकी शिकायत एसपी से करने की बात कही है।
सूत्रों के अनुसार, जिस ठेकेदार के लिए यह सड़क निर्माण कार्य हो रहा है, वह तेलंगाना के एक वरिष्ठ मंत्री का करीबी बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी वजह से पुलिस उस ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई से बच रही है।
दरोगा जी को अफसरों की नसीहत की परवाह नहीं
पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार अपने अधीनस्थों को आम नागरिकों के साथ शालीन व्यवहार करने और जनता के बीच विश्वास कायम करने की हिदायत देते हैं। लेकिन गोलापल्ली के थानेदार पर लगे आरोप इस नसीहत को ठेंगा दिखाते नज़र आ रहे हैं। शासकीय कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार पुलिस की साख पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोग कहते हैं कि जब नक्सली हिंसा कम हो रही है, तब इस तरह की पुलिसिया गुंडागर्दी जनता के बीच नया डर पैदा कर रही है।
“ नहीं ली गई मुरूम खनन की अनुमति” — रेंजर
गोलापल्ली वन परिक्षेत्र अधिकारी एच. प्रसाद राव ने पुष्टि की कि सड़क निर्माण कार्य के लिए न तो ठेकेदार और न ही लोक निर्माण विभाग ने मुरूम उत्खनन या पेड़ों की कटाई के लिए विभाग से अनुमति ली थी। उन्होंने बताया कि करीब 33 घन मीटर से अधिक क्षेत्र में अवैध उत्खनन किया गया है। रेंजर के अनुसार, “हमने इस मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है। साथ ही थानेदार द्वारा वनकर्मी से की गई मारपीट की जानकारी भी दी गई है।”
पीड़ित कर्मचारी ने एसडीओपी कोंटा को आवेदन सौंपकर थानेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की प्रति एसपी सुकमा, गृहमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री को भी भेजी गई है।
पुलिस का पक्ष
गोलापल्ली थानेदार सिराज खान ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा मैं सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण करने गया था। वहां वनकर्मी द्वारा कार्य बंद कराया जा रहा था। मैंने उसका मोबाइल लेकर केवल वीडियोग्राफी डिलीट की, कोई मारपीट नहीं की।”
जांच के आदेश
एसडीओपी कोंटा राजन नाग ने बताया, रेंजर के वाहन चालक की ओर से शिकायत पत्र मिला है, जिसे एसपी कार्यालय भेजा गया है। एसपी के निर्देश पर मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



