बिलासपुर। शहर के बहुचर्चित मस्तूरी गोलीकांड की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि पुलिस की जांच पर नए सवाल उठने लगे हैं। वारदात को अंजाम देने वाले हमलावरों के पास से 5 देशी पिस्टल, दो कट्टा और कई कारतूस मिले थे, लेकिन अब तक यह राज़ नहीं खुल पाया कि इतना बड़ा हथियार जखीरा आखिर आया कहां से?
पुलिस ने अब तक 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें इस खौफनाक हमले का मास्टरमाइंड निष्कासित कांग्रेस नेता विश्वजीत अनंत और उसके दो भाई अरमान उर्फ बलमजीत और चाहत उर्फ विक्रमजीत शामिल हैं। इनके साथ मो. मतीन उर्फ मोंटू समेत कई आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। पुलिस ने चार आरोपियों को 5 दिन की रिमांड पर लेकर लगातार पूछताछ की, लेकिन हथियार सप्लायरों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
साजिश में राजनीतिक कनेक्शन की एंट्री!
एसएसपी रजनेश सिंह ने खुलासा किया है कि गिरफ्तार आरोपियों के कांग्रेस नेता तारकेश्वर पाटले और नागेंद्र राय से गहरे संबंध रहे हैं। पुलिस को मिले साक्ष्यों के मुताबिक, नागेंद्र राय के इशारे पर तारकेश्वर पाटले ने विश्वजीत को शूटर्स के लिए एक लाख रुपए मुहैया कराए थे। दोनों नेता फिलहाल फरार हैं, और पुलिस का मानना है कि इन्हीं से हथियार सप्लायरों की कड़ी जुड़ी हो सकती है।
वारदात जिसने पूरे जिले को हिला दिया
यह हमला 28 अक्टूबर की रात मस्तूरी जनपद उपाध्यक्ष नीतेश सिंह के कार्यालय में हुआ था। नकाबपोश बदमाशों ने करीब से ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हमले में पूर्व सरपंच चंद्रकांत सिंह और राजू सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे। नीतेश सिंह ने बचाव में अपनी लाइसेंसी पिस्टल से जवाबी फायरिंग की, जिससे हमलावर मौके से भाग निकले। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से हथियार भी बरामद किए, लेकिन असली ‘गन नेटवर्क’ अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है। पूछताछ के दौरान आरोपी गोलमोल जवाब देकर जांच टीम को गुमराह करते रहे।फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि हथियार सप्लायरों और फरार नेताओं की तलाश में पुलिस की कई टीमें छापेमारी कर रही हैं।



