जगदलपुर। 1.5 करोड़ रुपए के इनामी नक्सली मोजुल्ला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने 15 अक्टूबर को सरकार के सामने हथियार डालने के बाद पहला वीडियो संदेश जारी कर बड़ा ऐलान किया है — उन्होंने कहा कि संगठन के कई लोग उन्हें गद्दार कह रहे हैं, पर वह गद्दार नहीं हैं। “वर्तमान परिस्थितियाँ बदल गई हैं,” भूपति ने कहा और बताया कि वे अपने अन्य 60 साथियों के साथ हथियार छोड़कर सार्वजनिक जीवन में लौटना चाहते हैं।
भूपति की मुखर अपील:
“हमें जनता से दूर होकर हथियारबंद रास्ते पर चलने की कीमत चुकानी पड़ी — साथियों की मौतों के बाद हमें आत्ममंथन करना पड़ा। अब यह वक्त बंदूक उठाने का नहीं, जनता के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीकों से लड़ने का है।” उन्होंने अपने संगठन के बाकी साथियों से भी हिंसा छोड़कर सरेंडर करने की अपील की और वह इच्छुक नक्सलियों के लिए अपना संपर्क नंबर 8856038533 जारी किया।
रूपेश — छत्तीसगढ़ का बड़ा सरेंडर:
भूपति के बाद सीसी मेंबर रूपेश (सतीश उर्फ टी. वासुदेव राव) ने भी आत्मसमर्पण कर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए। रूपेश ने कहा कि दंडकारण्य की बैठकों में उन्हें उत्तर बस्तर के साथी की चिंता नहीं बताई गई, और पार्टी उन्हें नुकसान का जिम्मेदार ठहरा रही है — इसलिए उन्होंने और उनके सैकड़ों साथियों ने कानून के दायरे में आकर काम करने का फैसला लिया। रूपेश का नंबर प्रशासन ने भी साझा किया है: 6267138163।
विशाल सरेंडर अभियान:
17 अक्टूबर को जगदलपुर में कुल 210 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष सरेंडर किया — साथ में 153 हथियार भी सौंपे गए। इस श्रृंखला में छोटे व बड़े दर्जनों नेतृत्वकर्ता शामिल रहे, जिससे संगठन के भीतर वैचारिक संकट और नेतृत्व असहमति का संकेत मिलता है।
संगठन की प्रतिक्रिया व भविष्य:
नक्सल संगठन ने तुरंत पलटवार में इन सरेंडर को लेकर एक पर्चा जारी कर कई सरेंडर किए हुए साथियों को ‘गद्दार’ करार दिया। भूपति ने इसे संगठन की कठोरता और बदलाव के प्रतिरोध का उदाहरण बताया — उनका कहना है कि सेंट्रल कमेटी स्थिति समझ रही है पर संघर्ष में बदलाव लाने को तैयार नहीं है।



