Dev Uthani Ekadashi : आज 1 नवंबर को देवउठनी एकादशी(Dev Uthani Ekadashi) है। ज्योतिष शास्त्र में इसे अबूझ मुहूर्त कहा गया है – यानी इस दिन बिना कोई अलग मुहूर्त निकाले भी विवाह या अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
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पुराणों के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और भगवान शालग्राम (विष्णु) तथा माता तुलसी (लक्ष्मी का स्वरूप) का विवाह होता है। इसी के साथ विवाह सीजन की शुरुआत मानी जाती है।
विवाह मुहूर्त 2025–26
इस साल (2025) शादियों की शुरुआत 2 नवंबर से होगी और आख़िरी मुहूर्त 6 दिसंबर तक रहेगा। दिसंबर में केवल 3 मुहूर्त रहेंगे, क्योंकि शुक्र ग्रह अस्त रहेगा। 15 दिसंबर के बाद धनुर्मास शुरू हो जाता है, जिसमें विवाह नहीं किए जाते।
2026 में कुल 59 विवाह मुहूर्त रहेंगे।
हालांकि जनवरी में एक भी शुभ मुहूर्त नहीं होगा, क्योंकि शुक्र अस्त रहेगा।
पहला विवाह मुहूर्त 5 फरवरी 2026 को और आखिरी 6 दिसंबर 2026 को रहेगा।
कुछ क्षेत्रों में 23 जनवरी (वसंत पंचमी) को भी परंपरा अनुसार शादियां होंगी।
देव जागरण और तुलसी विवाह का महत्व
कार्तिक शुक्ल एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) को भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की परंपरा है। इस दिन घरों और मंदिरों में विशेष पूजा, भजन और आरती होती है। शाम को तुलसी और शालग्राम का विवाह किया जाता है। यदि कोई तुलसी-विवाह नहीं करवा पाता, तो केवल तुलसी और शालग्राम की पूजा भी शुभ मानी जाती है।
पौराणिक कथा: क्यों होता है तुलसी- शालग्राम विवाह
वामन पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन रूप में राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी थी। बलि ने वचन निभाते हुए सिर झुकाया और भगवान ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। बलि ने भगवान से निवेदन किया कि वे उसके महल में रहें। तब से भगवान विष्णु चार महीने पाताल में रहते हैं (चातुर्मास) और देवउठनी एकादशी को पुनः वैकुंठ लौटते हैं।
शिव पुराण के अनुसार, वृंदा के श्राप से विष्णु पत्थर के रूप — शालग्राम — बन गए थे। बाद में लक्ष्मी जी के निवेदन पर वृंदा ने विष्णु को श्राप से मुक्त किया और स्वयं तुलसी रूप में प्रकट हुईं। तब से तुलसी और शालग्राम का विवाह करने की परंपरा शुरू हुई।
निष्कर्ष
देवउठनी एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि साल के सबसे शुभ सीजन की शुरुआत भी मानी जाती है। इस दिन से घरों में खुशियों और मांगलिक कार्यों का दौर शुरू हो जाता है।



