बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के लैब टेक्नीशियनों को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति दीपक कुमार तिवारी की एकलपीठ ने “समान कार्य समान वेतन” के सिद्धांत को दोहराते हुए आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी लैब टेक्नीशियनों को ₹2800 ग्रेड पे दिया जाए। साथ ही, पिछली तिथि से वेतन संशोधित कर दो माह के भीतर बकाया राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित अदा करने को कहा गया है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब कर्मचारियों की योग्यता, कार्य और जिम्मेदारी समान हैं, तो अलग-अलग वेतन देना समानता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामले में यह पाया गया कि वर्ष 2014 में जारी भर्ती विज्ञापन में लैब टेक्नीशियन पद के लिए ₹2800 ग्रेड पे निर्धारित था, लेकिन नियुक्ति आदेश में इसे घटाकर ₹2400 कर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने इसे मनमाना और असंवैधानिक बताया था।
सरकार की दलीलें खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि प्रदेश के अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों में लैब टेक्नीशियनों को पहले से ₹2800 ग्रेड पे दिया जा रहा है, इसलिए समान पद पर कार्यरत कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
इस फैसले को न्यायिक मिसाल माना जा रहा है, जिससे न केवल लैब टेक्नीशियनों बल्कि समान श्रेणी के अन्य तकनीकी कर्मचारियों को भी राहत मिल सकती है।



