रायपुर। छत्तीसगढ़ का ‘गौरव’ माना जाने वाला सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल भीमराव अंबेडकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज (मेकाहारा) अब बदहाली की मिसाल बन चुका है! रोजाना इलाज की खामियां, डॉक्टरों का अभद्र व्यवहार, मारपीट और मरीजों को सड़क पर मरने के लिए छोड़ने की घटनाएं तो आम हैं, लेकिन इस बार का मामला तो काला सच उजागर करने वाला है। एक झकझोर देने वाले वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है, जिसमें एक ही बिस्तर पर दो-दो मरीजों को लिटाकर इलाज किया जा रहा है! क्या यही है स्वास्थ्य मंत्री और राज्य सरकार का ‘विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवा’ का दावा? मरीजों की जिंदगियां दांव पर लगी हैं, और व्यवस्था सो रही है।
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वीडियो में साफ दिख रहा है कि ओवरक्राउडिंग की चरम स्थिति में मरीजों को बिस्तरों पर ‘सामान’ की तरह ठूंस-ठूंसकर रखा गया है। एक मरीज तो बिस्तर के किनारे लटकते हुए सांस ले रहा है, जबकि दूसरा ऊपर चढ़कर गुजारा कर रहा। तीमारदारों के चेहरे पर डर और गुस्सा साफ झलक रहा है। “यहां तो बेड ही नहीं, जगह भी नहीं! मरीज को आराम कैसे मिलेगा? संक्रमण फैलने का खतरा तो बढ़ ही रहा है,” एक तीमारदार ने वीडियो में चिल्लाते हुए कहा। यह वीडियो रातोंरात वायरल हो गया, और अब सवाल उठ रहे हैं – क्या मेकाहारा अब ‘मौत का अस्पताल’ बन गया है?
मेकाहारा में ऐसी घटनाएं कोई नई नहीं। पिछले दिनों आग लगने, बाउंसरों की मारपीट और कोविड काल में शवों की लाइन जैसी विडंबनाएं तो सामने आ चुकी हैं। लेकिन एक बिस्तर पर दो मरीज? यह तो सीधा स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आईना है! राज्य सरकार के लाख दावों के बावजूद, यहां न बेड की कमी दूर हुई, न स्टाफ की। सैकड़ों मरीज रोजाना इमरजेंसी में ठोकरें खा रहे हैं, और इलाज के नाम पर सिर्फ झोलाछाप व्यवस्था। अब विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है – “मेकाहारा को सुधारो, वरना जनता सड़कों पर उतरेगी।
स्वास्थ्य विभाग से तत्काल प्रतिक्रिया की मांग हो रही है। क्या मंत्री जी अब भी कहेंगे कि ‘सब कंट्रोल में है’? यह वीडियो न सिर्फ मेकाहारा की बदइंतजामी उजागर कर रहा है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। मरीजों की जिंदगी बचाना सरकार का फर्ज है, या यह सिर्फ चुनावी ड्रामा? जयकारा लगाने से पहले, इन बिस्तरों पर लेटकर देख लीजिए।



