रायपुर. भारत माला प्रोजेक्ट घोटाले में कल 28 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के विद्वान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने 8 शासकीय अधिकारी-कर्मचारीयों की अंतरिम जमानत खारिज कर दी थी। आज तत्काल कार्यवाही करते हुए ई.ओ.डब्ल्यू ने उनमें से 3 आरोपियों को गिरफतार कर लिया है।
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ई.ओ.डब्ल्यू में पंजीबद्ध अपराध कमांक-30/2005, धारा -7 सी, धारा-12 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम – 1980, संशोधित – 2018 एवं धारा 409, 467, 468, 471, 420, 120 बी भा.द.वि के आरोप में लोकसेवक के रूप में कार्यरत दिनेश पटेल (तत्कालीन पटवारी नायकबांधा), लेखराम देवांगन (तत्कालीन पटवारी टोकरो) एवं बसंती घृतलहरे (तत्कालीन पटवारी भेलवाडीड) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपीयों को आज विशेष न्यायालय, रायपुर में पेश किया गया है।
ई.ओ.डब्लू.ने मिडिया को बताया कि मुआवजा प्राप्त करने वाले एवं अन्य व्यक्तियों के द्वारा आपराधिक षडयंत्र कर वर्ष 2020 से 2024 में भारतमाला परियोजना रायपुर – विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनोमिक कॉरीडोर के भू-अर्जन प्रकरण में शासन द्वारा अर्जित भूमि को पुन शासन की विक्रय कर मुआवजा देने, बैक डेट में बंटवारा और नामांतरण करना, भूमि स्वामी बदले किसी अन्य को मुआवजा देने एवं निजी भूमि के ग़लत मुआवजा तथा उसके टुकड़े कर उपखण्डों में विभाजित कर मुआवजा राशि हड़प कर शासन के साथ छल करते हुए धोखाधड़ी कर करोड़ रुपये की आर्थिक हानि कारित करने के आरोप में इन तीनों की गिरफ्तारी की गई है। इनके द्वारा लोकसेवक पद पर रहते हुए पद का दुरुपयोग कर प्राइवेट व्यक्तियों से षडयंत्र कर भारत माला परियोजना में प्रभावित होने वाली भूमि के भूमि स्वामियों का बैक डेट में खाता विभाजन जिसे बंटाकन भी कहा जाता है एवं नामांतरण का कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के भी आरोप है।
इन आरोपियों के विरुद्ध पूर्व में माननीय न्यायालय द्वारा वारंट जारी कर उद्घोषणा करा कर कुर्की की कार्यवाही की जानी थी। इसी बीच माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा इनकी गिरफ्तारी में रोक लगायी गयी थी। लेकिन कल 28 अक्टूबर को माननीय उच्च न्यायालय द्वारा गिरफ्तारी से रोक हटाने जाने के पश्चात इन्हें गिरफ्तार किया गया है। प्रकरण के अन्य 5 आरोपी अभी भी फरार है, जिनकी तलाश की जा रही है।



