रायपुर। राजधानी और उसके ग्रामीण इलाकों में अवैध प्लाटिंग और सरकारी जमीन पर कब्जे का बड़ा नेटवर्क चल रहा है। नई प्लाटिंग नीति आने से पहले बीते दो साल में 1300 से ज्यादा प्रकरण उजागर हुए हैं, जिनमें सरकारी भूमि कब्जा, किसानों की जमीन पर फर्जी प्लाटिंग और अवैध कॉलोनियां बसाने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक ज्यादातर मामलों में कार्रवाई नहीं हुई है और फाइलें दफ्तरों में धूल खा रही हैं।
100 से ज्यादा केस में पत्र, सिर्फ 25 में एफआईआर
नगर निगम रायपुर के आंकड़ों के मुताबिक, जांच के बाद 100 से ज्यादा प्रकरणों में जोन कमिश्नरों ने संबंधित थानों को एफआईआर दर्ज कराने के लिए पत्र लिखा, लेकिन अब तक सिर्फ 25 मामलों में ही प्राथमिकी दर्ज हो पाई है। शेष 75 से अधिक मामले थानों में पेंडिंग हैं।
पुलिस का तर्क — “पहचान और सीमांकन के दस्तावेज नहीं”
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई मामलों में कब्जा करने वालों की पहचान स्पष्ट नहीं है या फिर सीमांकन-बटांकन के दस्तावेज अधूरे हैं। इस कारण पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने से एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही। कई आवेदन तो थानों में जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं।
1000 से ज्यादा खसरा नंबर अब भी कब्जे में
निगम अधिकारियों के मुताबिक, राजधानी में 1000 से ज्यादा खसरा नंबर अब भी अवैध कब्जे में हैं। पिछले दो सालों में सबसे ज्यादा प्रकरण जोन-10 क्षेत्र से सामने आए हैं। सिर्फ इस जोन से ही 200 से अधिक अवैध प्लाटिंग के केस दर्ज हुए हैं। इसके अलावा शासकीय भूमि कब्जे के 93 प्रकरणों में टिकरापारा और मुजगहन थानों में एफआईआर के लिए आवेदन भेजे गए हैं।
प्रशासन और पुलिस एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे
नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने कहा – “थानों से जानकारी मांगी गई है, जो उन्हें दी जा रही है। जोन आयुक्तों को विभागीय अधिनियम के तहत कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं एएसपी लखन पटले ने कहा – “जोन कमिश्नर के पत्र के बाद भी एफआईआर क्यों नहीं हो रही है, इसकी जांच करवाई जाएगी। किस जोन से कितने आवेदन आए, इसकी जानकारी निकलवाई जा रही है।”
ग्रामीण इलाकों में भी बड़ा नेटवर्क
रायपुर जिले में ही 300 से ज्यादा खसरा नंबरों पर अवैध प्लाटिंग के मामले सामने आए हैं। इनमें से 100 प्रकरण नगर निगम क्षेत्र में और 200 से ज्यादा ग्रामीण इलाकों में हैं। लगातार शिकायतों के बाद निगम ने कई खसरा नंबर ब्लॉक किए, हालांकि बाद में कुछ को खोला भी गया।



