Cyclone Montha : दुनिया के दो छोरों पर एक साथ समुद्री तूफानों का कहर बढ़ रहा है। एक ओर कैरेबियाई सागर में बना चक्रवात ‘मेलिसा’ अब कैटेगरी-5 के बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी ओर भारत के आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ रहा ‘मोंथा’ (Cyclone Montha) चक्रवात भी तेजी से ताकतवर हो रहा है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि इन तूफानों की तेजी से बढ़ती रफ्तार और उनकी अनियमित गतिविधि धरती के बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है।
24 घंटे में दोगुनी हुई मेलिसा की रफ्तार
रिपोर्टों के मुताबिक, तूफान मेलिसा ने शनिवार तक 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलना शुरू किया था, लेकिन सिर्फ 24 घंटे में इसकी गति 225 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। यह अब कैटेगरी-5 का तूफान बन चुका है, जो मजबूत इमारतों को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
एमआईटी के वैज्ञानिक केरी इमैनुएल ने कहा, “इस बार अटलांटिक में कम तूफान बने, लेकिन जो भी बने, वे बेहद तेजी से ताकतवर हुए — यह जलवायु परिवर्तन का सीधा असर है।”
समुद्र की गर्मी से मिलती है तूफानों को ऊर्जा
वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र के गर्म होने से तूफानों को अधिक ऊर्जा मिलती है, जिससे वे ज्यादा शक्तिशाली बन जाते हैं। क्लाइमेट सेंट्रल के वैज्ञानिक डैनियल गिलफोर्ड ने बताया, “वायुमंडल का गर्म होना कभी-कभी तूफानों को कमजोर करता है, लेकिन समुद्र का गर्म होना उन्हें और ताकत देता है — और आखिर में समुद्र ही जीतता है।”
आंध्र प्रदेश में ‘मोंथा’ का बढ़ता खतरा
भारत में बंगाल की खाड़ी से उठ रहा चक्रवात ‘मोंथा’ (Cyclone Montha) भी अब तेजी से ताकतवर हो रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 28 अक्टूबर की सुबह तक यह गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।
संभावना है कि यह तूफान काकीनाडा के पास, मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच तट से टकराएगा। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक और तेज झोंके 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं।
प्रशासन ने तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे तीव्र और “रुकने वाले” तूफान (स्टॉलिंग साइकलोन) की घटनाएं और बढ़ेंगी।
जलवायु परिवर्तन के चलते समुद्र का तापमान जितना बढ़ेगा, तूफान उतनी ही अधिक शक्ति और अवधि प्राप्त करेंगे, जिससे मानव बस्तियों, कृषि और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा असर पड़ सकता है।



