Chhath Sandhya Arghya: सनातन परंपरा में छठ महापर्व का विशेष महत्व है। यह चार दिवसीय पर्व नहाय-खाय से आरंभ होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होता है। मान्यता है कि छठी मैया अपने भक्तों के दुख-कष्ट हरकर परिवार को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।
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आज छठ पर्व का तीसरा दिन है — जिसे संध्या अर्घ्य का दिन कहा जाता है। व्रती आज अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे और परिवार की मंगलकामना करेंगे।()
🕔 आज सूर्यास्त का समय
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त(Chhath Sandhya Arghya) के समय दिया जाता है। आज सूर्यास्त का समय शाम 5 बजकर 40 मिनट रहेगा। छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान इसी समय किया जाता है।
वहीं, कल यानी 28 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होगा, जब व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगे।
🌼 संध्या अर्घ्य की विधि
- संध्या अर्घ्य के समय व्रती स्वच्छ व पवित्र वस्त्र धारण करते हैं — प्रायः पीले या सफेद रंग के।
- नदी, तालाब या जलाशय के तट पर जाकर एक स्वच्छ स्थान का चयन किया जाता है।
- पूजा सामग्री में ठेकुआ, सिंघाड़ा, फल, नींबू, और गुड़ का प्रसाद रखा जाता है।
- दीपक और घी पहले से तैयार कर लिया जाता है।
- अर्घ्य देते समय सूर्य देव के मंत्रों का जाप करते हुए पूर्ण श्रद्धा और ध्यान में रहना चाहिए।
☀️ संध्या अर्घ्य का महत्व
मान्यता है कि डूबते सूर्य को अर्घ्य (Chhath Sandhya Arghya) देना जीवन के निरंतर चक्र का प्रतीक है।
शाम के समय सूर्य देव अपनी किरण ‘प्रत्यूषा’ के साथ रहते हैं। अतः इस समय उन्हें अर्घ्य देने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और संतान की उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।



