गरियाबंद। वन्यजीवों और मानव सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गरियाबंद जिले के जंगलों में तकनीक की नई पहल शुरू की जा रही है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व फॉरेस्ट के उपनिदेशक वरुण जैन ने एक नया “एआई कैमरा एप” तैयार कराया है, जो जंगलों और मानव आवासीय क्षेत्रों के बीच होने वाली टकराव की घटनाओं को रोकने में मदद करेगा।
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यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरा सिस्टम हाथी, तेंदुआ, भालू जैसे जंगली जानवरों की पहचान कुछ ही सेकंड में कर सकता है। जैसे ही कैमरा किसी खतरनाक जानवर को डिटेक्ट करता है, सिस्टम तुरंत सायरन बजाकर अलर्ट जारी करता है और आसपास के ग्रामीणों तथा वनकर्मियों को संदेश (अलर्ट कॉल) भेजता है, ताकि वे सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। इसके साथ ही ग्रामीणों को मोबाइल के जरिए तुरंत जानकारी मिलती है और वे स्वयं को और अन्य निवासियों को सतर्क कर सकते हैं।
इस कैमरे का मुख्य उद्देश्य है मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और जनहानि को रोकना। उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि हाल ही में हुई एक दुखद घटना के बाद इस अत्याधुनिक प्रणाली को विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसे अब वास्तविक जंगल क्षेत्रों में परीक्षण के लिए लगाया जा रहा है।
उपनिदेशक वरुण जैन ने कहा, “यह एआई कैमरा सिस्टम हमारे ‘गज संकेत’ एप की तरह ही एक और बड़ा कदम है, जो न केवल वन्यजीव संरक्षण बल्कि मानव सुरक्षा में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।”



