Bhai Dooj 2025: दीपावली पर्व का समापन भाई-बहन के स्नेह के प्रतीक पर्व भाई दूज (Bhai Dooj) के साथ होता है। इस दिन बहनें अपने भाई की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगल कामना के लिए उनके माथे पर तिलक लगाती हैं।
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इस वर्ष भाई दूज पर तिलक करने के लिए सिर्फ 2 घंटे 15 मिनट का महाशुभ मुहूर्त प्राप्त है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इसी समय में तिलक करना सबसे शुभ माना गया है।
🕑 भाई दूज तिलक का महाशुभ मुहूर्त
- तिथि: 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार)
- समय: दोपहर 1:13 बजे से 3:28 बजे तक
- अवधि: लगभग 2 घंटे 15 मिनट
यह अवधि पूजा, आरती और तिलक विधि के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी समय में तिलक करने से यम के भय से मुक्ति मिलती है और भाई के जीवन में मंगल की वृद्धि होती है।
⚠️ राहु काल का समय
इस वर्ष भाई दूज (Bhai Dooj) के दिन राहु काल दोपहर 1:30 से 2:54 बजे तक रहेगा।
यह समय अशुभ माना जाता है, इसलिए बहनों को सलाह दी जाती है कि वे राहु काल से पहले या बाद में तिलक करें।
🌞 अन्य शुभ मुहूर्त
यदि मुख्य मुहूर्त में तिलक संभव न हो, तो नीचे दिए गए कालखंड भी शुभ माने गए हैं —
मुहूर्त समय विशेषता
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे – दोपहर 12:28 बजे दिन का सबसे शुभ समय, सभी कार्यों के लिए उत्तम
विजय मुहूर्त दोपहर 1:58 बजे – 2:43 बजे सफलता और विजय प्राप्ति के लिए शुभ
अमृत काल शाम 6:57 बजे – रात 8:45 बजे सभी शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी
🙏 भाई दूज का पौराणिक महत्व
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व ‘यम द्वितीया’ कहलाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे। यमुना ने तिलक लगाकर उनकी आरती उतारी और आतिथ्य से प्रसन्न यमराज ने उन्हें वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
इसी परंपरा के तहत आज भी बहनें भाइयों के माथे पर तिलक कर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं, जबकि भाई बहनों को उपहार देकर स्नेह और रक्षा का वचन देते हैं।



