रायपुर। गोवर्धन पूजा के अवसर पर इस बार मुख्यमंत्री निवास में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि “ना यह सरकार विश्व आदिवासी दिवस मनाती है, ना छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्यौहारों का सम्मान करती है। आज गोवर्धन पूजा पर भी कोई आयोजन नहीं हुआ। भाजपा को केवल धर्म के नाम पर वोट लेना आता है, लेकिन परंपरा निभाने में उनकी कोई रुचि नहीं है।”
छत्तीसगढ़ की परंपराओं के सम्मान की मांग
बघेल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संदेश समूह में कार्य करने और एकता का प्रतीक है। “अगर सभी एकजुट हो जाएं, तो गोवर्धन पर्वत उठाया जा सकता है। उसी तरह छत्तीसगढ़ की समस्याएं भी एकता से हल हो सकती हैं,” उन्होंने कहा।
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उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की संस्कृति और पहचान को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रही है। “छत्तीसगढ़ियों को पीछे धकेलने का षड्यंत्र हो रहा है। सरकार छत्तीसगढ़िया प्राइड को खत्म करने का काम कर रही है,” बघेल ने कहा।
राज्योत्सव और सरकार पर भी साधा निशाना
राज्योत्सव को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा— “दो साल हो गए, सरकार ने किया क्या? BJP सरकार के पास जनता को बताने के लिए न कोई योजना है, न कोई उपलब्धि।”
कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान
बघेल ने बताया कि कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान को लेकर गुरुवार को दिल्ली में बैठक होगी। इसमें केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, CWC सदस्य, सभी नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शामिल रहेंगे। सभी पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
BJP पर संगठन और नेतृत्व को लेकर तंज
BJP द्वारा कांग्रेस के अभियान पर तंज कसने पर बघेल ने पलटवार करते हुए कहा— “हम अपना देख लेंगे। पहले BJP बताए कि राष्ट्रीय अध्यक्ष कब बनाएंगे। दो साल से ज्यादा हो गया, अब तक अध्यक्ष नहीं बदल पाए। BJP में वन टू चलता है, सामंजस्य की कमी है।”
नक्सलवाद पर नीति और बयान
नक्सलवाद को लेकर बघेल ने कहा— “विकास, विश्वास और सुरक्षा योजना हमारी थी। कांग्रेस सरकार ने अबूझमाड़ में पट्टा वितरण कर विश्वास जीता था। 600 गांव खाली कराए, जिससे नक्सलवाद की कमर टूटी। उसी नीति से नक्सल प्रभाव कम हुआ।”
गुजरात मॉडल और भ्रष्टाचार पर वार
भ्रष्ट अधिकारियों की सूची पर BJP के तंज का जवाब देते हुए बघेल बोले— “मेरे सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को दूर-दूर भेज दिया गया। यह सरकार खुद नहीं चलती, गुजरात से आए तीन लोग बंद कमरे में बैठकर निर्देश देते हैं और उसी के अनुसार काम होता है।”
नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन को बताया अव्यवहारिक
उन्होंने कहा— “नक्सलवाद एक ऐसी समस्या है जिसे डेडलाइन में खत्म नहीं किया जा सकता। एक घटना से दहशत फैल जाती है। जो लोग इस पर गंभीर अध्ययन कर चुके हैं, वे जानते हैं कि इसे केवल समय नहीं, नीति और भरोसे से खत्म किया जा सकता है।”



