रायपुर। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार 210 नक्सलियों ने शुक्रवार को एक साथ आत्मसमर्पण किया। इस ऐतिहासिक कदम ने जहां प्रदेश और देश भर में सुर्खियां बटोरीं, वहीं इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस बड़ी घटना पर कहा यह देश की लड़ाई जल्द खात्मे की ओर बढ़ रही है। सरकार और सुरक्षा बलों को बधाई। हम सब मिलकर जीतेंगे। लेकिन बघेल की इस तारीफ पर प्रदेश के मंत्री केदार कश्यप ने तीखा पलटवार किया।
उन्होंने एक्स (Twitter) पर लिखा –
शुक्रिया बघेल जी तारीफ के लिए, लेकिन यह बताइए कि यह आपकी निजी राय है या कांग्रेस का अधिकृत बयान? आपकी पार्टी के नेता तो इस आत्मसमर्पण को ‘इवेंट’ बता रहे हैं, और प्रदेश अध्यक्ष असली-नकली नक्सली का सवाल उठा रहे हैं। आखिर कांग्रेस कब तक इस लड़ाई को कमजोर करती रहेगी? कश्यप ने आगे कहा दरभा घाटी में झीरम हमले के बाद भी कांग्रेस की भूमिका संदिग्ध रही। राहुल गांधी ने नक्सलियों को क्लीन चिट दी थी। अगर आपकी पार्टी ने महेंद्र कर्मा का साथ दिया होता, सलवा जुडूम का विरोध न किया होता, तो यह जंग इतनी लंबी नहीं चलती। देश की आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर दोहरी राजनीति बंद कीजिए।

इस पर बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद का दंश दशकों तक झेला है और कांग्रेस ने तो अपने शीर्ष नेतृत्व को भी खोया। भाजपा के शासन में नक्सल विरोधी लड़ाई इच्छाशक्ति से खाली थी। हमारी सरकार ने 2018 में पहली बार नक्सल उन्मूलन नीति बनाई, कैंप खोले, सड़कें और स्कूल बनाए, और माओवादियों की मांद में घुसकर उन्हें चुनौती दी,। उन्होंने आगे जोड़ा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का सहयोग रहा और हमारी ‘विश्वास–विकास–सुरक्षा’ नीति को नई सरकार ने भी आगे बढ़ाया है। यही छत्तीसगढ़ की असली जीत है।



