जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर सरकार और सुरक्षा बलों की सख्त रणनीति का असर अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। एक समय घने जंगलों में निर्दोषों का खून बहाने वाले नक्सली अब सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षाबलों की निरंतर कार्रवाई के आगे हथियार डालने को मजबूर हैं।
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शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025, को प्रदेश में नक्सल उन्मूलन अभियान का एक नया अध्याय लिखा जाएगा, जब 140 से अधिक नक्सली मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होंगे।
आत्मसमर्पण से पहले नक्सली प्रवक्ता रूपेश का संदेश
आत्मसमर्पण से ठीक एक दिन पहले, नक्सलियों के प्रवक्ता रहे रूपेश उर्फ़ तक्कलापल्ली वशुदेव राव (सतीश) ने अपने साथियों के नाम एक संदेश जारी किया है।
उन्होंने कहा,
“हमारे जो साथी अब भी सशस्त्र संघर्ष जारी रखना चाहते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि हमने यह निर्णय किन परिस्थितियों में लिया है। पहले हमें अपनी सुरक्षा के बारे में सोचना होगा। जब तक हम सुरक्षित नहीं हैं, तब तक किसी भी दिशा में आगे बढ़ना संभव नहीं है।”
रूपेश ने आगे कहा कि आंदोलन में अब कोई भविष्य नहीं बचा है, इसलिए साथियों को हालात की हकीकत स्वीकार करनी चाहिए।
आत्मसमर्पण में शामिल होने वालों के लिए संपर्क नंबर जारी
रूपेश ने कहा कि वर्तमान समय में नक्सलियों को सरकार द्वारा दिए जा रहे अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कई साथी अभी इस प्रक्रिया से अनजान हैं, विशेषकर वे जो अन्य राज्यों में सक्रिय हैं।
इन साथियों से संपर्क के लिए रूपेश ने एक मोबाइल नंबर (62671383163) जारी किया है, ताकि जो नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहें, वे संपर्क कर सकें।
रूपेश ने कहा,
“मैं उम्मीद करता हूं कि सभी साथी इस संदेश को गंभीरता से लें और सही निर्णय लेकर अपने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करें।
प्रदेश में बढ़ रहा आत्मसमर्पण का सिलसिला
बीते कुछ महीनों में प्रदेश के कई जिलों — बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर — में सैकड़ों नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
सरकार का दावा है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और मार्च 2026 तक बस्तर क्षेत्र को नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य है।



