RNN ब्यूरो रिपोर्ट
रायपुर. छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के नाम पर ईओडब्ल्यू के अनुसार 48 करोड़ के इस सुनियोजित घोटाले ने आखिरकार कोर्ट में एंट्री कर ली है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW-ACB) ने सोमवार को विशेष PMLA कोर्ट में 7600 पन्नों का बम धमाका चार्जशीट के रूप में दाखिल कर दिया। करीब एक साल की खोजी कार्रवाई के बाद 10 आरोपी नामजद, जिनमें भूमाफिया, राज्य सरकार के राजस्व अफसर और NHAI के बड़े अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।
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राज्य खजाने को 32 करोड़ का सीधा चूना लगाया गया
ये आंकड़े EOW की कोर्ट में प्रस्तुत चार्जशीट से ही निकले हैं, जो भूमि अधिग्रहण और सड़क निर्माण के बहाने की गई लूट की पूरी पटकथा खोलते हैं।

ईओडब्ल्यू द्वारा प्रस्तुत चालान में निम्न मामलों की विवेचना वर्तमान में की गई है –
(1) रायपुर भारतमाला परियोजना (रायपुर–विशाखापट्टनम सड़क निर्माण) अंतर्गत प्रभावित ग्रामों में से ग्राम नायकबांधा, ग्राम टोकरो एवं ग्राम उरला की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में बैक डेट में बटांकन और नामांतरण की अनियमितताओं की जांच की गई है, जिसमें राजस्व अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से फर्जी बंटवारा एवं नामांतरण कर अधिक मुआवज़ा प्राप्त किए जाने का प्रकरण सम्मिलित है।
(2) नायकबांधा जलाशय से संबंधित पूर्व अधिग्रहित भूमि का पुनः मुआवज़ा भुगतान करने का प्रकरण, तथा
(3) उमा तिवारी के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भूमि का नामांतरण कर मुआवज़ा प्राप्त करने का प्रकरण।

कैसे रची गई साजिश? प्रोजेक्ट रिपोर्ट लीक, जमीनों का ‘टुकड़े-टुकड़े’ खेल
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (950 किमी फोरलेन-सिक्सलेन सड़क) के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण के नाम पर भ्रष्टाचार का सुनियोजित षड्यंत्र चला। EOW की जांच में ही खुलासा: राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से प्रोजेक्ट रिपोर्ट लीक हो गई, फिर जमीन कारोबारियों ने एक ही प्लॉट को अलग-अलग टुकड़ों में बांटकर NHAI को भी षड्यंत्र में शामिल कर लिया। बैकडेटेड दस्तावेज, फर्जी खसरा नंबर, अपात्र लोगों को मुआवजा – सब कुछ मिला-जुला। NHAI के 4 अधिकारियों की भूमिका भी बहुत गहरी दिखाई दे रही है क्योंकि उन्होंने ने ही हेराफेरी को हरी झंडी दिखाई। राजस्व विभाग के 2 SDM समेत अफसर-कर्मचारियों पर भी FIR दर्ज, लेकिन कई अभी भी फरार है और जांच अटकी हुई है।
गिरफ्तारियां हुईं, जमानत मिली – लेकिन घोटाला उजागर!
जमीन कारोबारी हरमीत खनूजा और विजय जैन समेत 4 मुख्य आरोपी पहले ही EOW की जद में आ चुके हैं। इन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई, लेकिन चार्जशीट ने फिर से फंदा कस दिया है। EOW ने छापों में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मोबाइल, बैंक रिकॉर्ड्स जब्त कर सबूतों का पहाड़ खड़ा कर दिया है। पटवारी, RI, तहसीलदार जैसे छोटे-बड़े 8 आरोपी अभी भी जद से बाहर है, अदालत ने संपत्ति कुर्की की चेतावनी दी है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि 11 जिलों में फैला ये सिंडिकेट अब कोर्ट की जद में आ गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने घोटाले की जांच रिपोर्ट केंद्र को भेजीं
सूत्रों के अनुसार इस मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट केंद्र सरकार द्वारा तलब करने पर भेज दी गई है। गौरतलब है कि ईडी ने भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले के संबंध में दर्ज एफआईआर और जांच प्रतिवेदन की जानकारी ईओडब्ल्यू से मांगी थी। इस मामले में ईडी की ओर से ईसीआईआर दर्ज की जा सकती है। जानकारों के अनुसार शुरुआती अनुमान से ये मामला बहुत बड़ा है। जिसमें कुछ आईएएस अधिकारीयों सहित कुछ बड़े राजनेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं।
राज्य को 32 करोड़ का नुकसान, आंकड़े और बहुत ज्यादा। किसान लुटे – सवाल उठे: कौन बचाएगा विकास का सपना?
भारतमाला जैसी महत्वाकांक्षी योजना का ये काला अध्याय छत्तीसगढ़ के विकास को ठप कर रहा है। EOW का दावा: भू-माफियों – राज्य और केंद्र अफसरों ने मिलकर करोड़ों की बंदरबांट की। किसानों का मुआवजा लूटा, राज्य का खजाना खाली। अब विशेष कोर्ट में सुनवाई शुरू, लेकिन सवाल वही: क्या ये चार्जशीट भ्रष्टाचार के सारे चेहरे बेनकाब करेगी, या फिर सत्ता के खेल में दब जाएगी? छत्तीसगढ़ की सड़कें तो बनेंगी, लेकिन भ्रष्टाचार का जाल कब फटेगा?



