रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में 11 साल बाद शुरू की गई पार्किंग शुल्क वसूली व्यवस्था विवादों में घिर गई है। रोजाना करीब 4,000 मरीजों की आमद वाले इस प्रमुख संस्थान में अब वाहन लेकर प्रवेश करते ही 10 से 50 रुपए तक का शुल्क देना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे मरीजों और उनके परिजनों में आक्रोश फैल गया है।
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सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि इस पार्किंग ठेके का संचालन कोरबा जिले के कुख्यात अपराधी चीना पांडे और उसके गिरोह के हाथों में बताया जा रहा है। पांडे के खिलाफ हत्या, डकैती, वसूली और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों के कई मामले दर्ज हैं। यहां तक कि उसके खिलाफ जिला बदर की कार्रवाई भी हो चुकी है।
एम्स प्रशासन का कहना है कि वाहनों की संख्या बढ़ने से अस्पताल परिसर में अव्यवस्था फैल रही थी, इसलिए पार्किंग ठेका देने का निर्णय लिया गया। लेकिन अब “पहले पैसे दो, फिर इलाज कराओ” जैसी स्थिति बन गई है। मरीजों को 5 मिनट के लिए भी वाहन खड़ा करने पर शुल्क देना पड़ रहा है।
परिसर में जगह-जगह ठेका कंपनी ‘एसएस मल्टीसर्विसेस एम्स रायपुर’ के बैनर लटकाए गए हैं। कर्मचारियों पर आरोप है कि सवाल करने पर वे मरीजों और परिजनों को धमकाते हैं। एक मरीज ने कहा — “हम गरीब हैं, बीमारी झेल रहे हैं, ऊपर से यह जबरन वसूली। पहले कभी ऐसा नहीं होता था।”
वहीं ऑटो चालकों ने भी प्रवेश शुल्क के कारण भाड़ा 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। पहले 50 रुपये में मरीजों को पहुंचाने वाले अब 80 से 100 रुपये तक ले रहे हैं। इससे झगड़े की स्थिति बनने लगी है।
एम्स के जनसंपर्क अधिकारी मृत्युंजय राठौर ने कहा — “वाहनों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए ठेका दिया गया है, जिससे व्यवस्था बनी रहे।” हालांकि, उन्होंने ठेकेदार की आपराधिक पृष्ठभूमि पर कोई टिप्पणी नहीं की।



