नई दिल्ली : टैरिफ बाधाओं और भू-राजनीतिक तनाव जैसी वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय कंपनियों ने मजबूत क्रेडिट प्रोफाइल बनाए रखा है। रेटिंग एजेंसी ICRA की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की घरेलू मांग-आधारित अर्थव्यवस्था की वजह से अमेरिका के ऊंचे टैरिफ का बड़ा असर सीमित रहने की संभावना है।
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अमेरिका का 50% टैरिफ : हीरा, कपड़ा और समुद्री भोजन पर असर
अमेरिका ने भारत के कुछ प्रमुख निर्यात क्षेत्रों पर 50% टैरिफ लगाया है।
इससे कट एंड पॉलिश्ड डायमंड (CPD), कपड़ा और समुद्री भोजन जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, अगर मार्च 2026 तक टैरिफ जारी रहा तो भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 4-5% की गिरावट आ सकती है।
घरेलू रुझानों से मिल रही मजबूती
ICRA ने कहा कि:
GST सुधार, आयकर में राहत, ब्याज दरों में कटौती और खाद्य मुद्रास्फीति में कमी से घरेलू खपत को बढ़ावा मिलेगा।
इसका खास फायदा शहरी मांग को होगा।
इन सकारात्मक संकेतों के चलते FY26 की GDP वृद्धि का अनुमान 6.5% कर दिया गया है (पहले से 0.5% ज्यादा)।
रेटिंग ट्रेंड : सुधार ज्यादा, गिरावट कम
FY26 की पहली छमाही में 214 कंपनियों की रेटिंग सुधारी गई।
इसी अवधि में 75 कंपनियों की रेटिंग घटी।
यानी क्रेडिट रेश्यो 2.9 गुना रहा।
यह सुधार खासकर बिजनेस फंडामेंटल मजबूत होने, पैरेंट कंपनियों की अच्छी क्रेडिट प्रोफाइल और पावर-रोड सेक्टर में प्रोजेक्ट रिस्क घटने की वजह से आया।
असर सीमित रहने का अनुमान
ICRA के कार्यकारी उपाध्यक्ष के. रविचन्द्रन ने कहा कि अमेरिका भारत के कुल निर्यात का लगभग 20% हिस्सा है, लेकिन GDP में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ 2% है। ऐसे में बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पर असर सीमित रहने की उम्मीद है।



