Maa Skandmata Ki Katha: शारदीय नवरात्रि 2025 के छठे दिन मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। उन्हें भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में जाना जाता है। मां स्कंदमाता को गोद में बालक कार्तिकेय के साथ कमल के फूल पर विराजमान दिखाया जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना करने से संतान सुख के साथ-साथ जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और शांति मिलती है।
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मां स्कंदमाता की व्रत कथा
यह कथा तारकासुर नामक दैत्य से जुड़ी है। तारकासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान लिया कि केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही उसकी मृत्यु होगी। इसके बाद देवताओं ने भगवान शिव से विवाह करने और पुत्र उत्पन्न करने का आग्रह किया। माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह से कार्तिकेय का जन्म हुआ, जिन्हें युद्ध कला और अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान मां ने ही दिया।
कार्तिकेय ने अपने पराक्रम और मां की शिक्षा से तारकासुर का वध किया और तीनों लोकों को उसके अत्याचार से मुक्त किया। (Maa Skandmata Ki Katha)
पूजन और महत्व
मां स्कंदमाता की पूजा करने से भक्तों को संतान सुख, ज्ञान, बुद्धि और चेतना की प्राप्ति होती है। उनके सच्चे भक्ति से मोक्ष भी संभव है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। गोद में बालक कार्तिकेय विराजमान होने का प्रतीक यह है कि मां अपने भक्तों की रक्षा हर समय करती हैं। (Maa Skandmata Ki Katha)



